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आयुर्वेदिक औषधि

त्रिवृत चूर्ण

संदर्भ: भैषज्य रत्नावली, विरेचनाधिकार; चरक संहिता, चिकित्सा स्थान १/३

त्रिवृत चूर्ण एक महीन आयुर्वेदिक पाउडर है जो आंतों की सफाई और मल त्याग को आसान बनाता है। यह पंचकर्म के विषहरण (विरेचना) चरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नियमित सेवन से कब्ज़, पेट-फूलना और त्वचा संबंधी छोटी समस्याओं में राहत मिल सकती है। इसे एयर-टाइट कंटेनर में रखने पर एक वर्ष तक इसकी शक्ति बनी रहती है। उपयोग से पूर्व योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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त्रिवृत चूर्ण  image

उपयोग और लाभ

चिकित्सीय उपयोग और खुराक

कब्ज़ (विबंध): 3–5 ग्राम, गर्म पानी के साथ, अधिकतम 2-3 सप्ताह तक।

त्वचा रोग (कुष्ठ): 3–5 ग्राम प्रतिदिन, गर्म पानी के साथ।

विरेचन चिकित्सा (पंचकर्म): चिकित्सक के निर्देशानुसार खुराक, गर्म पानी के साथ।

पेट फूलना (अधमान): 3–5 ग्राम, गर्म पानी के साथ।

सावधानी: 2-3 सप्ताह से अधिक समय तक निरंतर उपयोग न करें। मधुमेह रोगियों के लिए केवल तब ही उपयोग करें जब रक्त शर्करा नियंत्रित हो।

मुख्य सामग्री

मुख्य घटक

  • त्रिवृत रेजिन (Operculina turpethum): शक्तिशाली लेकिन कोमल पर्जेटिव क्रिया, वात और कफ संतुलन, अम निष्कासन।

नोट: कुछ परंपरागत तैयारी में गुड़, शहद, इलायची या केसर जैसे अतिरिक्त घटक हो सकते हैं।

खुराक और अनुपान

खुराक और सेवन विधि

सामान्य खुराक: 3–5 ग्राम (लगभग ½ से 1 चम्मच) प्रतिदिन।

सेवन का तरीका: गर्म पानी के साथ सोने से पहले या सुबह खाली पेट।

भंडारण: एयर-टाइट कंटेनर में रखें, एक वर्ष तक प्रभावी।

सावधानी: अन्य आधुनिक दवाओं के साथ सेवन करने से पूर्व चिकित्सक से परामर्श लें। दोनों दवाओं के बीच 30-45 मिनट का अंतर रखें।

त्रिवृत चूर्ण आयुर्वेद का एक शक्तिशाली लेकिन कोमल पर्जेटिव (दस्तकारक) है जो मुख्य रूप से ऑपरकुलिना टर्पेथम (त्रिवृत) के रेजिन से बनाया जाता है। यह वात और कफ दोषों को संतुलित करता है तथा शरीर में जमा अम (विषाक्त पदार्थ) को बाहर निकालने में मदद करता है। आधुनिक शोध में पाया गया है कि इसमें एन्थ्राक्विनोन ग्लाइकोसाइड्स, रेजिन और फ्लेवोनॉयड्स होते हैं जो आंतों में पानी की मात्रा बढ़ाकर मल को नरम बनाते हैं।

इसकी मुख्य क्रियाएँ हैं:

  • कब्ज़ में राहत (वात और कफ संतुलन द्वारा)
  • पेट फूलना और अजीर्ण में लाभ
  • त्वचा स्वास्थ्य में सुधार (अम निष्कासन द्वारा)
  • पंचकर्म के विरेचन चिकित्सा में उपयोग

आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण

शोध से पता चलता है कि त्रिवृत में मौजूद यौगिक आंतों की गति को उत्तेजित करते हैं और मल त्याग को आसान बनाते हैं। इसके अलावा, इसके एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण आंतों की परत को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। क्लिनिकल अवलोकनों के अनुसार, यह सिंथेटिक लैक्सेटिव्स की तरह पेट में तेज दर्द नहीं करता और इसका सुरक्षित उपयोग 2-3 सप्ताह तक किया जा सकता है।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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