त्रिवृत चूर्ण आयुर्वेद का एक शक्तिशाली लेकिन कोमल पर्जेटिव (दस्तकारक) है जो मुख्य रूप से ऑपरकुलिना टर्पेथम (त्रिवृत) के रेजिन से बनाया जाता है। यह वात और कफ दोषों को संतुलित करता है तथा शरीर में जमा अम (विषाक्त पदार्थ) को बाहर निकालने में मदद करता है। आधुनिक शोध में पाया गया है कि इसमें एन्थ्राक्विनोन ग्लाइकोसाइड्स, रेजिन और फ्लेवोनॉयड्स होते हैं जो आंतों में पानी की मात्रा बढ़ाकर मल को नरम बनाते हैं।
इसकी मुख्य क्रियाएँ हैं:
- कब्ज़ में राहत (वात और कफ संतुलन द्वारा)
- पेट फूलना और अजीर्ण में लाभ
- त्वचा स्वास्थ्य में सुधार (अम निष्कासन द्वारा)
- पंचकर्म के विरेचन चिकित्सा में उपयोग
आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण
शोध से पता चलता है कि त्रिवृत में मौजूद यौगिक आंतों की गति को उत्तेजित करते हैं और मल त्याग को आसान बनाते हैं। इसके अलावा, इसके एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण आंतों की परत को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। क्लिनिकल अवलोकनों के अनुसार, यह सिंथेटिक लैक्सेटिव्स की तरह पेट में तेज दर्द नहीं करता और इसका सुरक्षित उपयोग 2-3 सप्ताह तक किया जा सकता है।

