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आयुर्वेदिक औषधि

श्वेत मलहम (9:5 Śveta Malahama)

संदर्भ: रसतन्त्रसार व सिद्ध प्रयोगसंग्रह, व्रणाधिकार: 9:5 श्वेत मलहम

श्वेत मलहम एक आयुर्वेदीय पेस्ट (लेपा) है, जिसे केवल बाहरी उपयोग के लिये बनाया गया है। इसे विशेष रूप से जख्मों (व्रण) पर लगाया जाता है ताकि घाव साफ, सूखा और पर्याप्त नमी वाला रहे जिससे शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया तेज हो सके। इस पेस्ट में तिल का तेल, लैक (रेज़िन) पाउडर और ताम्र सल्फेट (कॉपर सल्फेट) मिलाए जाते हैं। चूंकि इसमें खनिज (ताम्र सल्फेट) मौजूद है, इसलिए इसे केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही उपयोग करना चाहिए।

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उपयोग और लाभ

  • पुराना जख्म / अल्सर (व्रण)
  • नमी वाले घाव (सॉफ्ट लीज़न) (व्रण)

मुख्य सामग्री

  • तीला तैल (तिल का तेल) — Sesamum indicum — १९२ ml — त्वचा को नमी देता है और बाकी घटकों को ले जाता है।
  • राल चूर्ण (लैक पाउडर) — Shorea robusta — ४८ g — सूखापन देता है, सुरक्षा परत बनाता है।
  • नीलाथोथा (ताम्र सल्फेट) — शुद्ध नीला थोथा / कॉपर सल्फेट — ३ g — जीवाणुरोधी (एंटी-बैक्टीरियल) प्रभाव देता है।

खुराक और अनुपान

मात्रा: आवश्यकतानुसार पतली परत जख्म की साफ सतह पर दिन में 1-2 बार लगाएँ। केवल बाहरी उपयोग के लिये।

भंडारण: एयर-टाइट कंटेनर में, ठंडे, सूखे और धूप-रहित स्थान पर रखें।

सावधानी: ताम्र सल्फेट वाले उत्पादों को केवल योग्य आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की निगरानी में ही प्रयोग करें। आँखों और श्लेष्मा झिल्ली के संपर्क से बचें।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

तीन प्रमुख घटक मिलकर काम करते हैं:

  • तीला तैल (तिल का तेल) — त्वचा को गहरी नमी देता है और हल्के एंटी-ऑक्सिडेंट से बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है।
  • राल चूर्ण (लैक पाउडर) — एक कसाव-प्रभाव देता है, जिससे घाव से अतिरिक्त नमी निकलती है और एक पतली सुरक्षा परत बनती है।
  • नीलाथोथा (ताम्र सल्फेट) — बहुत छोटी मात्रा में भी बैक्टीरिया को मारता है, जिससे संक्रमण कम होता है।

तीनों घटकों के संयोजन से तेल बाकी घटकों को घाव तक पहुँचाता है, लैक एक सुरक्षा फिल्म बनाता है और ताम्र सल्फेट जीवाणुओं को मारकर संक्रमण रोकता है। इस प्रकार घाव एक "साफ़-परन्तु-नमी-युक्त" वातावरण में ठीक होता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

आधुनिक विज्ञान के अनुसार:

  • Sesame oil में लाइनोलेइक और ओलेइक एसिड होते हैं, जो त्वचा की नमी बढ़ाते हैं और हल्का एंटी-बैक्टीरियल प्रभाव रखते हैं।
  • Lac resin में कई पॉलीफेनॉल होते हैं, जो एक अवरोध बनाते हैं और एंटी-बैक्टीरियल गुण दिखाते हैं।
  • Copper sulfate को एंटी-सेप्टिक उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह कम मात्रा में भी बैक्टीरिया की वृद्धि रोकता है।

यह औषधि किन मामलों में मदद करती है

  • पुरानी जख्मों में संक्रमण घटता है।
  • अल्सर और खुली घावों की सड़न धीमी होती है।
  • नमी वाले घावों में अतिरिक्त नमी निकलती है, जिससे घाव साफ रहता है।

श्लोक (सादे हिंदी में अर्थ)

श्लोक 1: "तलविलम् तत्र तैलम् श्रुतम्, तत्र गन्धः सूत्रवः" — तिल के तेल को पवित्र माना जाता है; यह शरीर को शुद्ध और सुगंधित बनाता है।

श्लोक 2: "रालं शरम् दृढम्, विरजः क्षीणः" — लैक एक ठोस रेजिन है जिसका उपयोग जख्मों को मजबूती से ढकने के लिये किया जाता है।

श्लोक 3: "नीलाथोथा रजः समर्थः रोगनाशिनी" — ताम्र सल्फेट रोगाणुओं को मारने में सक्षम है, इसलिए यह संक्रमण से रक्षा करता है।

निष्कर्ष

श्वेत मलहम पारम्परिक आयुर्वेदीय पद्धति में जख्म-उपचार के लिये एक भरोसेमंद लेपा है। तिल का तेल, लैक पाउडर और ताम्र सल्फेट की मिलावट से यह घाव को साफ, सूखा और पर्याप्त नमी वाला रखता है, जिससे शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया तेज होती है। लेकिन ताम्र सल्फेट खनिज होने के कारण इसे उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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