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आयुर्वेदिक औषधि

शंबूकाद्य तैल

संदर्भ: भैषज्यरत्नावली, कर्णरोगाधिकार 40-41

शंबूकाद्य तैल एक पुराने आयुर्वेदिक तेल है जिसे कर्ण (कान) में डाला जाता है। यह तेल सरसों के तेल और पानी में घोंघे के मांस को पकाकर तैयार किया जाता है। फोड़े या नलिका (फिस्टुला) को साफ़ करने और ठीक करने के लिए इसे कान में 2-5 बूँद के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह उपाय भैषज्यरत्नावली नामक प्राचीन ग्रन्थ में वर्णित है। बोतल को कस कर बंद रखें और ठंडे, सूखे स्थान पर धूप से दूर रखें।

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उपयोग और लाभ

कर्ण में फिस्टुला / नली (कर्णगत नाड़ीव्रण) – प्रभावित कान में 2-5 बूँद, दिन में 1-2 बार, आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अनुसार।

मुख्य सामग्री

  • कटु तैल (सरसों का तेल) – Brassica nigra (सरसों) – 768 ग्राम। गर्म और पतला, जिससे तेल जल्दी से कर्ण के भीतर तक पहुँचता है और रक्त-संचार बढ़ाता है।
  • शंबूक मांस (घोंघे का मांस) – Helix aspersa (घोंघा) – 250 ग्राम। प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य खनिजों से भरपूर; ऊतक-मरम्मत में मदद करता है और कसाव प्रभाव देता है।
  • जल (पानी) – 3 लीटर। घटकों को घोलने और तेल में घुलनशील पदार्थों को ले जाने में सहायक।

खुराक और अनुपान

खुराक: प्रभावित कान में 2-5 बूँद, दिन में 1-2 बार, आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अनुसार।

भंडारण: बोतल को कस कर बंद रखें, ठंडे-सूखे स्थान पर धूप से दूर रखें।

ध्यान दें: यह केवल बाहरी उपयोग के लिये है। गर्भावस्था, एलर्जी या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

कटु तैल (सरसों का तेल) – शरीर में गर्मी पैदा करता है, रक्त-संचार बढ़ाता है, जिससे संक्रमण-रहित वातावरण बनता है।

शंबूक मांस (घोंघे का मांस) – प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर, ऊतक-मरम्मत के लिए आवश्यक पोषक तत्व देता है; अस्ट्रिंजेंट प्रभाव से सूजन घटती है।

जल (पानी) – तेल को पतला करता है, जिससे वह कर्ण के छोटे-छोटे छिद्रों तक आसानी से पहुँचता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

सरसों के तेल में अलिल आइसोथायोसायनेट होता है, जो बैक्टीरिया और सूजन को कम करने में मदद करता है। घोंघे के मांस में कैल्शियम कार्बोनेट और कई सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं, जो ऊतक-स्थिरता बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। दोनों मिलकर तेल को सुगंधित बनाते हैं, सूजन घटाते हैं और कर्ण के नलिकीय भाग को साफ़ रखते हैं।

ये सामग्रियां मिलकर क्या करती हैं

  • कर्ण के भीतर जड़ी-बूटी-आधारित सफ़ाई में मदद करती हैं।
  • सूजन-घटाने और रक्त-संचार बढ़ाने का काम करती हैं।
  • टिश्यू (ऊतक) की फिर से बनावट में सहायक पोषक तत्व देती हैं।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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