सामग्री: क्रियाएँ और लाभ
स्वर्ण व रजत भस्म – शरीर की नई कोशिकाओं को जल्दी बनाते हैं। इससे टूटे हुए हिस्से जल्दी ठीक होते हैं और मन को शांति मिलती है।
अभ्रक व लौह भस्म – हड्डियों और रक्त को पोषित करते हैं। इससे थकान कम होती है।
शिलाजत – फुल्विक एसिड से भरपूर एंटी-ऑक्सिडेंट है। यह गुर्दे की कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है।
गंधक – शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को निकालता है। इससे पेशाब के काम में सुधार आता है।
तांबा-पाइराइट भस्म – खनिजों को सही संतुलन में रखता है। जल-मेटाबोलिज़्म (पानी का उपयोग) ठीक रहता है।
वरुण क़वाथ (क्राटेवा नुर्वला) – पेशाब को बढ़ाता है, सूजन कम करता है और मूत्र मार्ग को साफ़ रखता है।
आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या
शिलाजत के फुल्विक एसिड में एंटी-ऑक्सिडेंट शक्ति पाई गई है। यह प्रयोगशाला में गुर्दे की कोशिकाओं को नुकसान से बचाती है।
क्राटेवा नुर्वला के अर्क में पेशाब बढ़ाने वाले और सूजन-रोधी पदार्थ मिलते हैं। यह जानवरों पर किए गए अध्ययन में दिखा है।
स्वर्ण, रजत, अभ्रक व लौह भस्म को पारम्परिक आयुर्वेदिक विधि से बनाना उनके शरीर में आत्मसात होने को बढ़ाता है। लेकिन पूरी फॉर्मूले पर बड़े क्लिनिकल परीक्षण अभी नहीं हुए हैं।
इन सभी सामग्री से मिलने वाले परिणाम
गुर्दे की कार्यक्षमता – शिलाजत, वरुण क़वाथ और धातु-भस्म मिलकर गुर्दे के फ़िल्टरिंग काम को बेहतर बनाते हैं।
मूत्र मार्ग की सफ़ाई – गंधक और वरुण क़वाथ पेशाब में मौजूद बैक्टेरिया को घटाते हैं, जिससे संक्रमण कम होता है।
शरीर की स्फूर्ति – लौह व अभ्रक भस्म रक्त-हीमोग्लोबिन और हड्डियों को पोषित करते हैं, जिससे थकान दूर होती है।
