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आयुर्वेदिक औषधि

सर्वतोभद्रा वटी

संदर्भ: भैषज्यरत्नावली, वृक्कमयाधिकार १६-१७

सर्वतोभद्रा वटी एक आयुर्वेदिक दवा है जिसे शुद्ध जड़ी-बूटियों और धातु-भस्मों से तैयार किया जाता है। यह मुख्यतः गुर्दे और पेशाब के थैले (ब्लैडर) की कार्यक्षमता को सुधारने के लिए प्रयोग की जाती है। क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़, नेफ़्राइटिस, नेफ़्रोटिक सिंड्रोम और पेशाब के संक्रमण जैसी समस्याओं में यह मदद कर सकती है। साथ-साथ यह शरीर की ताक़त बढ़ाने, थकान कम करने और समग्र ऊर्जा को संतुलित करने में भी सहायक मानी जाती है।

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उपयोग और लाभ

क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ (वृक्करोग) – गुर्दे की कार्यक्षमता को बनाए रखने में सहायक।

नेफ्राइटिस और नेफ्रोटिक सिंड्रोम – गुर्दे की सूजन और प्रोटीन की हानि को कम करने में मदद करता है।

पेशाब-मार्ग संक्रमण (बस्तिगतरोग) – पेशाब में जलन और असहजता को कम करता है।

थकान-कमज़ोरी, ऊर्जा बढ़ाना (रसायन) – शरीर की ताकत और सहनशक्ति को बढ़ाता है।

मुख्य सामग्री

  • स्वर्ण भस्म (स्वर्ण) — स्वर्ण भस्म — 1 भाग
  • रजत भस्म (रजत) — रजत भस्म — 1 भाग
  • अभ्रक भस्म (अभ्रक) — अभ्रक भस्म — 1 भाग
  • लौह भस्म (लौह) — लौह भस्म — 1 भाग
  • शुद्ध शिलाजत (शिलाजत) — शुद्ध शिलाजत — 1 भाग
  • शुद्ध गंधक (गंधक) — शुद्ध गंधक — 1 भाग
  • स्वर्णाक्षिक भस्म (तांबा-पाइराइट) — तांबा-पाइराइट भस्म — 1 भाग
  • वरुण क़वाथ (क्राटेवा नुर्वला का कड़ाह) — क्राटेवा नुर्वला (वरुण) — पर्याप्त मात्रा (पेस्ट बनाने के लिये)

खुराक और अनुपान

खुराक: 125 mg (एक टैबलेट) दिन में एक या दो बार गुनगुने पानी या शहद के साथ लें।

सुरक्षा नोट: धातु-भस्म युक्त होने के कारण केवल प्रशिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही लें।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

स्वर्ण व रजत भस्म – शरीर की नई कोशिकाओं को जल्दी बनाते हैं। इससे टूटे हुए हिस्से जल्दी ठीक होते हैं और मन को शांति मिलती है।

अभ्रक व लौह भस्म – हड्डियों और रक्त को पोषित करते हैं। इससे थकान कम होती है।

शिलाजत – फुल्विक एसिड से भरपूर एंटी-ऑक्सिडेंट है। यह गुर्दे की कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है।

गंधक – शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को निकालता है। इससे पेशाब के काम में सुधार आता है।

तांबा-पाइराइट भस्म – खनिजों को सही संतुलन में रखता है। जल-मेटाबोलिज़्म (पानी का उपयोग) ठीक रहता है।

वरुण क़वाथ (क्राटेवा नुर्वला) – पेशाब को बढ़ाता है, सूजन कम करता है और मूत्र मार्ग को साफ़ रखता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

शिलाजत के फुल्विक एसिड में एंटी-ऑक्सिडेंट शक्ति पाई गई है। यह प्रयोगशाला में गुर्दे की कोशिकाओं को नुकसान से बचाती है।

क्राटेवा नुर्वला के अर्क में पेशाब बढ़ाने वाले और सूजन-रोधी पदार्थ मिलते हैं। यह जानवरों पर किए गए अध्ययन में दिखा है।

स्वर्ण, रजत, अभ्रक व लौह भस्म को पारम्परिक आयुर्वेदिक विधि से बनाना उनके शरीर में आत्मसात होने को बढ़ाता है। लेकिन पूरी फॉर्मूले पर बड़े क्लिनिकल परीक्षण अभी नहीं हुए हैं।

इन सभी सामग्री से मिलने वाले परिणाम

गुर्दे की कार्यक्षमता – शिलाजत, वरुण क़वाथ और धातु-भस्म मिलकर गुर्दे के फ़िल्टरिंग काम को बेहतर बनाते हैं।

मूत्र मार्ग की सफ़ाई – गंधक और वरुण क़वाथ पेशाब में मौजूद बैक्टेरिया को घटाते हैं, जिससे संक्रमण कम होता है।

शरीर की स्फूर्ति – लौह व अभ्रक भस्म रक्त-हीमोग्लोबिन और हड्डियों को पोषित करते हैं, जिससे थकान दूर होती है।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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