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आयुर्वेदिक औषधि

पिश्टी: आयुर्वेदिक खनिज दवा

संदर्भ: आयुर्वेदिक फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया, भाग II; रसरत्नसमुच्चय, रसरत्नाकर

पिश्टी एक विशेष आयुर्वेदिक खनिज दवा है जिसे शुद्ध खनिज या रत्न को गुलाब-जल जैसे ठंडे तरल पदार्थों से पीसकर तैयार किया जाता है। इसे अनाग्निताप्त भस्म कहा जाता है क्योंकि इसमें अग्नि का प्रयोग नहीं होता। यह बारीक पाउडर शरीर की गर्मी को ठंडा करता है, पित्त-दोष को शांत करता है और त्वचा, दिल, खांसी तथा मासिक-धर्म की समस्याओं में लाभकारी होता है।

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उपयोग और लाभ

  • हृदय में जलन और एसिड रिफ्लक्स (अम्लपित्त) – अकीक पिश्टी 125-250 मि.ग्रा शहद या नारियल पानी के साथ।
  • हृदय कमजोरी और धड़कन (हृदयदौर्बल्य) – 250 मि.ग्रा से 1 ग्रा गुलाब-जल या अर्जुन छाल के काढ़े के साथ।
  • चिंता और बेचैनी (चित्त-उद्वेग) – 250 मि.ग्रा पानी या गुलाब-जल के साथ।
  • खांसी और सांस संबंधी समस्याएं (कास/श्वास) – 125-250 मि.ग्रा ताजा अदरक के रस के साथ।
  • पथरी और मूत्र रुकावट (अश्मरी/मूत्राघात) – 725 मि.ग्रा से 1.25 ग्रा नारियल पानी या ठंडे पानी के साथ।

मुख्य सामग्री

  • अकीक पिश्टी – शुद्ध अकीक (अगेट) को एलोवेरा रस, केतकी फूल का रस और केले के रस के साथ पीसा जाता है।
  • जहर मोहरा पिश्टी – शुद्ध सर्पाट (मरमर-सदृश) को गुलाब-जल के साथ पीसा जाता है।
  • मुक्ता पिश्टी – शुद्ध ताजे पानी के मोती को गुलाब-जल के साथ पीसा जाता है।

खुराक और अनुपान

सामान्य खुराक: 125 मि.ग्रा से 1 ग्रा तक (पिश्टी के प्रकार और रोग की गंभीरता के अनुसार)।

  • पित्त विकार: शहद के साथ।
  • वात विकार: अश्वगंधा चूर्ण या काढ़े के साथ।
  • पाचन या हृदय संबंधी समस्याएं: ताजा अदरक का रस या गुलाब-जल के साथ।

भंडारण: पिश्टी को कांच की एयर-टाइट बोतल में ठंडी और सूखी जगह पर रखें।

पिश्टी कैसे काम करती है?

पिश्टी के ठंडे खनिज शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करते हैं, जिससे जलन, चिड़चिड़ापन और बेचैनी में राहत मिलती है।

एलोवेरा और केले के रस जैसे घटक पेट की परत को आराम देते हैं और हल्की अम्लता को कम करने में मदद करते हैं।

गुलाब-जल और कैल्शियम युक्त खनिज हृदय की मांसपेशियों को सहारा देते हैं और धड़कन को कम करते हैं।

सामग्री और उनके लाभ

  • अकीक (अगेट) – पित्त को ठंडा करता है, मन को शांत करता है। सिलिका और ट्रेस-खनिजों से भरपूर, हल्का एंटासिड प्रभाव देता है।
  • सर्पाट (जहर मोहरा) – हृदय की कमजोरी और जलन को कम करता है। कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर, मांसपेशियों की टोन में सुधार करता है।
  • एलोवेरा रस – पेट की परत को आराम देता है, पाचन तंत्र को साफ करता है। पॉलीसैकेराइड्स गैस्ट्रिक म्यूकोसा की रक्षा करते हैं।

हृदय के लिए विशेष लाभ

जहर मोहरा पिश्टी का उपयोग पारंपरिक रूप से हृदयदौर्बल्य (कमजोर हृदय) और छर्दि (उल्टी) में किया जाता है। खनिज आधार हृदय की मांसपेशियों को टोन बनाए रखने में मदद करता है, जबकि गुलाब-जल आंतरिक गर्मी को ठंडा करता है जो धड़कन और उल्टी को ट्रिगर कर सकती है।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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