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आयुर्वेदिक औषधि

नागार्जुनाञ्जन – नेत्रों के लिये आयुर्वेदिक आँजन

संदर्भ: भैषज्यरत्नावली, नत्ररोगाधिकार 123-127; चरक संहिता, वेदसंधि 45

NĀGĀRJUNĀÑJANA एक परम्परागत आयुर्वेदिक आँजन (आँखों पर लगाने वाला मलहम) है, जिसका उल्लेख प्राचीन ग्रन्थ भैषज्यरत्नावली में मिलता है। यह आँजन आँखों की जाँच-जाँच, शुरुआती मोतीबिंदु (टिमिरा) और नेत्र-परतों (पटल रोग) में होने वाली समस्याओं को हटाने में मदद करता है। इसे 14 जड़ी-बूटियों और धातु-भस्म (ताम्र भस्म) को बारी-बारी पीसकर, बरसात के पानी या डिस्टिल्ड वाटर से बना स्टिक (वर्तिक) बनाकर, फिर शहद, माँ के दूध या कमल के रस से पेस्ट (आँजन) तैयार कर निचली पलक पर लगाया जाता है।

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उपयोग और लाभ

शुरुआती मोतीबिंदु (टिमिरा) – दृष्टि धुंधलापन को कम करने में मदद करता है।

नेत्र-परत रोग (पटल रोग) – कॉर्निया, लेंस और रेटिना की समस्याओं में सहायक।

आँख-थकान और कंप्यूटर-आँख – लंबे स्क्रीन समय से होने वाली थकान को दूर करता है।

नेत्र-शोधन (नेत्र शोधन) – आँखों से विषैले पदार्थों को निकालकर लालिमा और जलन कम करता है।

मुख्य सामग्री

  • त्रिफला (हरीतकी, बिभीतकी, आमलकी) – 1 भाग, आँख के टिशू को धीरे-धीरे साफ़ करता है।
  • त्रिकटु (शुंठी, मरिच, पिप्पली) – 1 भाग, रक्त-संचार बढ़ाता है।
  • ताम्र भस्म – 9 भाग, आँख की स्पष्टता और संरचना को सपोर्ट करता है।
  • रासंजन (बरबेरी अरिस्ता एक्सट्रैक्ट) – 1 भाग, जीवाणु-रोधी, आँख के सतह को शीतल करता है।
  • यष्टि (मुलेठी) – 1 भाग, सूजन-रोधी, आँख को ठंडक देता है।
  • लोड्र (लोढ्रा) – 1 भाग, जलन-रोधी, आँख को आराम देता है।
  • सिंधुस्थ (सिंदूर ठ) – 1 भाग, नेत्र-परत को पोषित करता है।
  • तुत्थ – 1 भाग, विष-निवारक, आँख की स्वच्छता में मदद करता है।
  • प्रपौण्डरिक (कमल पंखुड़ी) – 1 भाग, आँजन को मुलायम बनाता है, आँख को कोमलता देता है।
  • जन्तुर्ण (जन्तुघ्न) – 1 भाग, संक्रामक-विरुध्द, आँख को रोग-मुक्त रखता है।
  • वीडंग (फल) – 1 भाग, पाचन-सहायक, अनावश्यक पदार्थों को हटाता है।
  • चित्रक (मूल) – 1 भाग, पाचन अग्नि को तेज़ करता है, आँजन के असर को बढ़ाता है।
  • चव्य (तना) – 1 भाग, शरीर को शक्ति देता है, आँजन को स्थिर रखता है।
  • गोमूत्र (गाय का मूत्र) – 18 भाग, जल-संतुलन में मदद करता है, आँजन के मिश्रण को घोलता है।
  • गुड़ – 9 भाग, मीठा स्वाद देता है, सामग्री को स्थिर रखता है।

खुराक और अनुपान

मात्रा: निचली पलक पर छोटा भाग (रजत-आकार), दिन में 1-2 बार।

अनुपान: शहद, माँ का दूध, कमल-रस या डिस्टिल्ड वाटर के साथ पेस्ट बनाकर लगाएँ।

भंडारण: एअर-टाइट काँच के डिब्बे में, सूखे और अंधेरे स्थान पर रखें। 1-3 साल में उपयोग करें।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

NĀGĀRJUNĀÑJANA में मौजूद घटकों का काम इस प्रकार है:

  • त्रिफला – आँख के टिश्यू को साफ़ करता है, डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करता है।
  • त्रिकटु (शुंठी-मरिच-पिप्पली) – रक्त-संचार बढ़ाता है, जिससे पौष्टिक तत्व जल्दी पहुँचते हैं।
  • ताम्र भस्म – आँख की संरचना (कॉर्निया, लेंस) को दृढ़ बनाता है।
  • रासंजन (बरबेरी) – जीवाणु-रोधी, जलन-कम करता है।
  • यष्टि व लोध्रा – ठंडक-प्रदान, सूजन-कम करने वाले गुण।
  • गोमूत्र – जल-संतुलन, आँजन को घोल-सुधारता है।
  • गुड़ – मिठास देता है, मिश्रण को स्थिर रखता है।

इन सबके मिलकर काम करने से आँखें साफ़, ठंडी और पोषित रहती हैं।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

आधुनिक अध्ययनों से पता चला है कि:

  • त्रिफला – एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर, रेटिना को फ्री-रैडिकल से बचाता है।
  • बरबेरी (रासंजन) – बर्बरिन नामक यौगिक में एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव पाया गया है, जो आँख के सतह को शांति देता है।
  • ताम्र (कॉपर) भस्म – कॉपर आयन टियर-फिल्म को स्थिर रखने में मदद करता है, जिससे आँसू का अभाव नहीं रहता।
  • मुलेठी (यष्टि) – फ्लेवोनॉइड्स में एंटी-ऑक्सिडेंट शक्ति है, जो आँख की सूजन को कम करती हैं।

ये जानकारी बताती है कि आँजन के घटक आँख की सामान्य सेहत में मदद कर सकते हैं, परन्तु रोग-निवारण या इलाज के लिये अकेले प्रयोग नहीं करना चाहिए।

यह आँजन किस-किस चीज़ में मदद करता है

  • नेत्र-सफाई – धूल, प्रदूषण और स्क्रीन-समय से बनी गंदगी हटाता है।
  • सूजन-शमन – लालिमा, जलन और सूजन कम करता है।
  • दृष्टि-सुधार – हल्की-मध्यम धुंधलापन को कम करता है, लेंस को साफ़ रखता है।
  • संरचनात्मक-सहायता – कॉर्निया, लेंस और रेटिना को मज़बूत बनाता है।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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