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आयुर्वेदिक औषधि

मंडूर भस्म

संदर्भ: आयुर्वेदिक फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया, भाग-II, भारत सरकार, भारतीय चिकित्सा पद्धति एवं होम्योपैथी विभाग; 2000

मंडूर भस्म एक आयुर्वेदिक दवा है जो लौह ऑक्साइड (लोहा) को कई बार गरम-ठंडा करके बहुत बारीक पाउडर बनाकर तैयार की जाती है। यह शरीर में हीमोग्लोबिन बनाकर लाल रक्त कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करती है, इसलिए इसे अक्सर लोहे की कमी से होने वाले एनीमिया (पाण्डु) के उपचार में दिया जाता है। मंडूर भस्म यकृत की सूजन, पीलिया, सूजन (एडिमा), प्लीहा का बड़ा होना, पाचन-कमज़ोरी, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम और आँत के कीड़े जैसी समस्याओं में भी सहायक मानी जाती है।

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उपयोग और लाभ

  • एनीमिया (पाण्डु) — लोहे की कमी को पूरा करने के लिए, हीमोग्लोबिन बढ़ाने और थकान कम करने में मदद करता है।
  • पीलिया और यकृत-विकार (कामला और यकृत रोग) — यकृत की सूजन और पीलिया के लक्षणों को कम करने में सहायक।
  • एडिमा (शोथ) — शरीर में अतिरिक्त तरल को निकालने में मदद करता है।
  • प्लीहा-वृद्धि (प्लीहा वृद्धि) — प्लीहा के कार्य को सामान्य करने में सहायक।
  • पाचन-कमज़ोरी (अग्निमांद्य और ग्रहणी) — पाचन अग्नि को तेज करने में मदद करता है, जिससे बदहजमी और फुलावट कम होती है।
  • आंत के कीड़े (कृमि) — परजीवी हटाने में सहयोगी।
  • माहवारी संबंधी विकार (रक्तप्रदर) — भारी माहवारी या रक्त हानि से होने वाली कमजोरी को कम करने में मदद करता है।

मुख्य सामग्री

  • मंडूर (लोहा भस्म) – लौह ऑक्साइड — शुद्ध लौह भस्म (9 भाग), शरीर को आसानी से पचने वाला आयरन देता है।

खुराक और अनुपान

खुराक: 125 mg से 250 mg (1-2 चुटकी), दिन में एक या दो बार।

अनुपान (किसके साथ लें): शहद, गुनगुना पानी या मट्ठा के साथ।

चाय, कॉफी या दूध के साथ न लें, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण को कम कर सकते हैं।

भंडारण: सूखे, हवादार और ढक्कन-बंद जार में रखें। धूप, नमी और अत्यधिक गर्मी से बचाएं।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

लोहा भस्म (मंडूर) — शरीर में आसानी से अवशोषित होने वाला आयरन देता है; रक्त-निर्माण (हीमोग्लोबिन) को बढ़ाता है, थकान कम करता है, और पित्त को शांत करके यकृत-संबंधी सूजन एवं पीलिया के लक्षण घटाता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

उच्च ताप-निचुरे प्रक्रिया से लौह ऑक्साइड को नैनो-कण-आकार में बदल दिया जाता है, जिससे यह सामान्य आयरन-साल्ट की तुलना में पेट में कम जलन देता है और अधिक आसानी से रक्त में घुलता है। कई क्लिनिकल अध्ययनों ने दर्शाया है कि सही मात्रा में मंडूर भस्म लेने से हीमोग्लोबिन स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, लेकिन परिणाम व्यक्तिगत शरीर-रचना और जी-आँड पर निर्भर कर सकते हैं।

एक साथ, ये सामग्रियां निम्नलिखित में सहायता करती हैं:

हीमोग्लोबिन निर्माण — लोहा रक्त-कणों को आकार देता है, जिससे शरीर को अधिक ऑक्सीजन मिलती है।

पित्त-संतुलन — पित्त की अधिकता को कम करके यकृत की सूजन घटाता है, इसलिए पीलिया में राहत मिलती है।

सिंड्रोमिक राहत — पाचन-अग्नि को सक्रिय करता है, जिससे बदहजमी, फुलावट और इरिटेबल बाउल जैसी समस्याओं में आराम मिलता है।

एडिमा-नियंत्रण — शरीर में जमा अतिरिक्त तरल को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे सूजन कम होती है।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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