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आयुर्वेदिक औषधि

कामिनी विद्रावण रस

संदर्भ: भैषज्य रत्नावली, वाजीकरणाधिकार ५०-५५; रस तंत्र सागर, वाजीकरण प्रकरण १२

कामिनी विद्रावण रस एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक योग है, जो पुरुषों की यौन शक्ति को बढ़ाने और यौन दुर्बलता को दूर करने में सहायक होता है। इसमें शुद्ध पारद, गंधक, लौह भस्म, स्वर्ण भस्म और अन्य जड़ी-बूटियों का मिश्रण होता है।

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उपयोग और लाभ

कामिनी विद्रावण रस का उपयोग यौन दुर्बलता, शीघ्रपतन, नपुंसकता, स्तंभन दोष और वीर्य की गुणवत्ता सुधारने के लिए किया जाता है।

मुख्य सामग्री

  • शुद्ध पारद — शुद्ध पारा
  • शुद्ध गंधक — शुद्ध गंधक
  • लौह भस्म — लोहे की भस्म
  • स्वर्ण भस्म — सोने की भस्म
  • वंग भस्म — टिन की भस्म
  • कपूर — Cinnamomum camphora

खुराक और अनुपान

मात्रा: 125 mg से 250 mg तक, दिन में एक या दो बार, गुनगुने दूध या पानी के साथ।

उपयोग की अवधि: चिकित्सक की सलाह अनुसार।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार, कामिनी विद्रावण रस वाजीकरण (यौन शक्ति बढ़ाने वाली) औषधियों की श्रेणी में आता है। यह शुक्र धातु को पुष्ट करता है और वीर्य की गुणवत्ता में सुधार लाता है।

उपयोग और लाभ

कामिनी विद्रावण रस निम्नलिखित समस्याओं में लाभकारी है:

  • यौन दुर्बलता और शीघ्रपतन
  • नपुंसकता और स्तंभन दोष
  • वीर्य की कमी और शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार
  • सामान्य कमजोरी और थकान

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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