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आयुर्वेदिक औषधि

ज्वरघ्नि गुटिका

संदर्भ: शार्ङ्गधरसंहिता, मध्यमखण्ड, अध्याय १२: ५६-५८

ज्वरघ्नि गुटिका एक शताब्दी-पुरानी आयुर्वेदिक गोली है जो हर तरह के बुखार (सरवज्वर) को शांत करने के लिए बनाई गई है। इस दवा में शुद्ध धातु-पदार्थ (पारद, गंधक) के साथ हल्दी, लंबी मिर्च, एलोवेरा, हरितकी आदि जड़ी-बूटियों का मिश्रण है। गोली को सामान्यतः ताज़ा गण्डूची (Tinospora cordifolia) के रस, जिसे चिन्ना रस कहा जाता है, के साथ लिया जाता है। क्योंकि इसमें शुद्ध पारद और गंधक होते हैं, इसे केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देख-रेख में ही लेना चाहिए।

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उपयोग और लाभ

बुखार (सर्वज्वर): सभी प्रकार के तीव्र बुखार में उपयोगी। शरीर के तापमान को कम करने, “अमा” को निकालने और असहजता को दूर करने में मदद करता है।

मुख्य सामग्री

  • शुद्ध पारद (शुद्ध पारा) – 1 भाग: शरीर में जमा “अमा” को निकालता है, रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है।
  • शुद्ध गंधक (शुद्ध कुंद) – 1 भाग: रोग-जनक जीवाणुओं को मारता है, अतिरिक्त नमी को सुखाता है।
  • एलइया (एलोवेरा जल) – 1 भाग: पेट को ठंडा करता है, सूजन-रोधी और रेचक प्रभाव देता है।
  • पिप्पली (लंबी मिर्च) – 1 भाग: पाचन को तेज़ करता है, अन्य जड़ी-बूटियों के अवशोषण में मदद करता है।
  • शिवा (हरितकी) – 1 भाग: पाचन को सहारा देता है, शरीर को पुनरुज्जीवित करता है, एंटीऑक्सीडेंट है।
  • आकारकारभ (पेल्लिटोरी जड़) – 1 भाग: ठंड और सर्दी को दूर करता है, रक्त-संचार को बेहतर बनाता है।
  • इन्द्रवृणी (कड़वा सेब) – 4 भाग: कड़वा द्रव्य, गुनगुना – जठर-तंत्र को साफ़ करता है, गर्मी को हटाता है।

खुराक और अनुपान

मात्रा: 1 ग्राम (एक माष) गोली, दिन में दो बार ताज़ा गण्डूची रस (30 मिली) के साथ। अधिकतम 5 दिन तक उपयोग करें।

भंडारण: ठंडी, सूखी जगह पर हवादार डिब्बे में रखें।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

शुद्ध पारद और शुद्ध गंधक मिलकर कजली बनते हैं। यह संयोजन रोग-जनक जीवाणुओं को मारता है और शरीर की गहरी “अमा” को बाहर निकालता है।

एलइया (एलोवेरा) पेट की सूजन को कम करता है, सूजन-रोधी गुण देता है और हल्का रेचक कार्य करता है।

पिप्पली (लंबी मिर्च) पिपरिन नामक यौगिक से भरपूर है, जो अन्य जड़ी-बूटियों के अवशोषण को बढ़ाता है और पाचन अग्नि (आग्नि) को तेज़ करता है।

शिवा (हरितकी) एंटीऑक्सीडेंट में समृद्ध है, लीवर और आंत की कोशिकाओं को बचाता है और पुराने रोगों से लड़ने में मदद करता है।

आकारकारभ (पेल्लिटोरी) ठंड और सर्दी को दूर करता है, शरीर में ठंड को बढ़ावा देता है और रक्त-संचार को सुधारता है।

इन्द्रवृणी (कड़वा सेब) अत्यधिक कड़वा होने के कारण तेज़ रेचक है, जो जठर-आंत के “अमा” को बाहर निकालता है और अत्यधिक गर्मी (पित्त) को घटाता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

एलोवेरा में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो जठर-आंत की सूजन को कम करते हैं।

लंबी मिर्च (पिप्पली) में पिपरिन पाचन तंत्र की एंजाइम सक्रियता को बढ़ाता है, जिससे औषधि का असर बढ़ता है।

हरितकी में टैनिन जैसे पदार्थ लिवर-सुरक्षा और एंटी-ऑक्सीडेंट प्रभाव देते हैं।

कड़वा सेब (इन्द्रवृणी) में सायनोजेनिक ग्लाइकोसाइड्स होते हैं जो हल्के-सख्त रेचक काम करते हैं। अधिक मात्रा में पेट में जलन हो सकती है, इसलिए डॉक्टर की निगरानी जरूरी है।

शुद्ध पारद-गंधक का प्रयोग आयुर्वेद में “सुधारित औषधि” माना जाता है, परंतु आधुनिक विज्ञान में इस पर अभी पर्याप्त क्लिनिकल डेटा नहीं है, इसलिए केवल विशेषज्ञ की देखरेख में ही उपयोग योग्य है।

यह सब मिलकर कैसे मदद करता है

  • उच्च ताप (पित्त) को घटाता है – पित्त-ज्वर को घटाने में मदद करता है।
  • जठर-आंत से “अमा” निकालता है – शरीर के अपशिष्ट को बाहर निकालता है और रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है।
  • पाचन अग्नि को तेज़ करता है – भोजन-पाचन को आसान बनाता है और पोषक तत्वों को बेहतर उपयोग करता है।
  • एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी मदद – संक्रमण के दौरान शरीर को अतिरिक्त सुरक्षा देता है।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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