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आयुर्वेदिक औषधि

जहरामोहरा पिष्टि

संदर्भ: सिद्धयोगसंग्रह, अध्याय १३:२, जहरामोहरा पिष्टि – चिकित्सीय संकेत

जहरामोहरा पिष्टि एक आयुर्वेदिक खनिज औषधि है। इसे शुद्ध सीरपेंटीन (जहरामोहरा) को गुलाब जल से पीसकर तैयार किया जाता है, जिससे गर्मी से बची रहती है और औषधि की शक्ति बनी रहती है। यह काँच की बंद बोतलों में रखी जाती है। परम्परागत रूप से यह हृदय को मजबूत बनाकर दिल-की-कमजोरी में मदद करती है, रक्त-अल्पता (एनीमिया) को सुधारने में सहायक है, उल्टी-की-इच्छा और पेट की जलन को कम करती है, तथा मन को शांत और रोग-प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाती है।

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उपयोग और लाभ

हृदय-की-कमजोरी (हृदयदौर्बल्य), रक्त-अल्पता (पांडु), उल्टी-की-इच्छा (चर्दी), पेट-की-जलन (दाह), गैस्ट्रोएंटेराइटिस (विषुचित), और मन-की-स्पष्टता एवं रोग-प्रतिरोधक शक्ति (रसायन)।

मुख्य सामग्री

  • जहरामोहरा (चूर्ण) – शुद्ध सीरपेंटीन (मैग्नीशियम सिलिकेट), 1 भाग।
  • गुलाब जल (शतपत्रिका) – गुलाब का जल, आवश्यक मात्रा में।

खुराक और अनुपान

खुराक: 250 मिलीग्राम से 1 ग्राम प्रतिदिन, दो बार बाँटकर। अनुपान: साफ पानी, गुलाब जल, या चंदन जल। एनीमिया में शहद के साथ लेना बेहतर। भंडारण: काँच की बंद बोतल में, ठंडी और सूखी जगह पर रखें।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

जहरामोहरा (शुद्ध) – ठंडा (शीत) और शमक (पिट्ट-को-शांत) माना जाता है। यह हृदय-कोष्ठ को स्थिर करता है, पित्त-की-अधिकता से होने वाली जलन को घटाता है और रक्त-निर्माण में मदद कर सकता है।

गुलाब जल – शीतल (शीत) और हृद्य (हृदय-के-लिए-फायदेमंद) गुण रखता है। यह पाउडर को सुगंधित बनाता है, पेट-की-जलन को कम करता है और हल्के एंटी-ऑक्सीडेंट प्रभाव देता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

समुद्री कोरल-आधारित कैल्शियम पाउडर में जैव-उपलब्ध कैल्शियम और ट्रेस-खनिज होते हैं, जो इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखने और हृदय-कार्य में सहायक हो सकते हैं। छोटे क्लिनिकल अवलोकनों में जहरामोहरा पिष्टि से हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार दिखा है, संभवतः खनिज-सहायता से आयरन के उपयोग में सुधार के कारण। गुलाब जल में हल्के एंटी-ऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण पाए गए हैं, जो पेट-की-जलन और मतली में मदद कर सकते हैं।

यह कैसे मदद करती है

जहरामोहरा और गुलाब जल मिलकर हृदय-की-कमजोरी, रक्त-अल्पता, उल्टी और पेट-की-जलन में मदद करते हैं। ठंडा-खनिज और हृदय-सुरक्षित गुलाब जल दिल-की-शक्ति बढ़ाते हैं, खनिज-स्रोत आयरन के उपयोग में मदद करता है, और शमक-गुण पाचन-अग्नि को संतुलित करते हैं।

ठंडक एवं शमक (शीत-और-शमक) असर

जहरामोहरा और गुलाब जल दोनों ठंडा (शीत) और शांत (शमक) हैं। इसलिए यह पित्त-अधिकता, पेट-की-जलन, हल्की सूजन और तनाव-से-बढ़े धड़कन को कम करता है, बिना पाचन-अग्नि को बंद किए।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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