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आयुर्वेदिक औषधि

८:१८ हिंग्वादी तैल

संदर्भ: चक्रदत्त, कर्णरोगचिकित्सा: १६

हिंग्वादी तैल एक पुरानी आयुर्वेदिक तेल है जो सरसों के तेल, हिंग (किण्वित सौंफ), अदरक और टम्बुरु (दन्त-दर्द के पेड़) के फल से बनती है। इसे मुख्य रूप से कर्ण-शूल (कान में दर्द) के लिए कान ड्रॉप्स के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पेट में गैस, फुलाव और प्रसवोत्तर पेट की असहजता को दूर करने के लिए यह तेल पेट पर मालिश में भी लगाया जाता है। इस तैल की तैयारी चक्रदत्त ग्रन्थ में बताई गई क्लासिक विधि पर आधारित है।

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उपयोग और लाभ

कर्ण-शूल (कान में दर्द) – प्रत्येक कान में ५-१० बूंदें डालें।

गैस व फुलाव (उदवर्ता) – पेट पर १०-१५ मिलीलीटर तेल से घड़ी की दिशा में मालिश करें।

प्रसव-पश्चात पेट की फूलावट – १०-१५ मिलीलीटर तेल से हल्की मालिश करें।

मुख्य सामग्री

  • हिंगु (किण्वित हिंग) – १ भाग, वात-शामक, गैस घटाता है।
  • टम्बुरु (टम्बुरु फल) – १ भाग, दर्द-निवारक, पाचन में सहायक।
  • शुंठी (सूखा अदरक) – १ भाग, शरीर को गर्मी देता, पाचन में मदद करता है।
  • सरसों का तैल – १२ भाग, औषधियों को ले जाता है, गर्मी प्रदान करता है।
  • पानी – ४८ भाग, घोल बनाता है, किण्वन में मदद करता है।

खुराक और अनुपान

कान में दर्द: प्रत्येक कान में ५-१० बूंदें डालें।

पेट पर मालिश: १०-१५ मिलीलीटर तेल से घड़ी की दिशा में मालिश करें।

प्रसव-पश्चात पेट की फूलावट: १०-१५ मिलीलीटर तेल से हल्की मालिश करें।

आंतरिक उपयोग केवल आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह पर ही करें।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

हिंगु (किण्वित हिंग) – यह औषधि वात को शांत करती है। पेट में जमा गैस को बाहर निकालती है।

टम्बुरु फल – दर्द को कम करता है और पाचन को सुधरने में मदद करता है।

शुंठी (सूखा अदरक) – शरीर को गर्मी देता, पाचन-अग्नि (आग्नि) को तेज़ करता और मतली घटाता है।

सरसों का तैल – गर्म और स्थिर आधार है। सभी जड़ी-बूटियों को गहराई तक पहुँचाता है।

पानी – किण्वन की प्रक्रिया को पूरा करता है और तेल को पतला बनाता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

समकालीन शोध दर्शाते हैं कि हिंग में सल्फर-युक्त यौगिक होते हैं जो आंत की मांसपेशियों को आराम देते हैं, जिससे गैस कम होती है। सरसों के तेल में सेसमिन और विटामिन ई जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं जो सूजन को घटा सकते हैं। अदरक में गिंजरॉल और शोगॉन्गोल होते हैं जो एंटी-इन्फ्लेमेटरी तथा एंटी-माइक्रोबियल प्रभाव डालते हैं। इन सब के मिलकर काम करने से पेट की असहजता और कान के दर्द में आराम मिल सकता है।

यह संयोजन क्या करता है

गैस, फुलाव, पेट-दर्द – हिंगु और अदरक की गरमी-शक्ति मिलकर पेट-अग्नि को तेज़ करती है। इससे गैस निकलती है।

कान-शूल – सरसों के तेल के कारण जड़ी-बूटियाँ कान के अंदर गहराई तक पहुँचती हैं। हिंगु-टम्बुरु का दर्द-निवारक असर तुरंत राहत देता है।

प्रसव-पश्चात पेट की असहजता – हल्की मालिश से रक्त-संचार बढ़ता है। “हवा” बाहर निकलती है और पेट आराम महसूस करता है।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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