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आयुर्वेदिक औषधि

9:2 गंधकाद्यमालहार

संदर्भ: Rasataraṅgiṇī, Aṣṭamataraṅga: 63-65

9:2 गंधकाद्यमालहार एक आयुर्वेदिक मलहम है जो बाहरी रूप से त्वचा पर लगाया जाता है। यह गंभीर त्वचा समस्याओं जैसे एक्जिमा, रिंगवर्म, पुख्ताल (दरारयुक्त एड़ी) और अन्य पुरानी खुजली वाले घावों को शांत करता है। शुद्ध शहद-तेल (सिक्था तैल) में शुद्ध गंधक, गिरिसिंदूर (लाल सीसा ऑक्साइड), शुद्ध तंकारा (बोरैक्स) और घनासारका (कंफर) मिलाकर तैयार किया जाता है। ये घटक मिलकर त्वचा को साफ़, खुजली कम और रोगाणुओं को मारते हैं। इसे साफ़ काँच के जार में रखकर ठंडी, सूखी जगह पर संग्रहित करें।

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उपयोग और लाभ

  • एक्जिमा (पाम) – खुजली और सूजन को कम करता है।
  • रिंगवर्म / फंगल पैच (डडरु) – संक्रमण को साफ़ करने में मदद करता है।
  • पुख्ताल (पड़दरी) – दर्दनाक दरारों को नरम और ठीक करता है।
  • अन्य पुरानी त्वचा रोग (कुष्ठ) – जलन कम करता है और त्वचा की बनावट में सुधार करता है।

मुख्य सामग्री

  • सिक्था तैल (शहद-तेल मिश्रण) – 72 ग्राम
  • शुद्ध गंधक – 6 ग्राम
  • गिरिसिंदूर – 6 ग्राम
  • शुद्ध तंकारा – 2 ग्राम
  • घनासारका (कंफर) – 2 ग्राम

खुराक और अनुपान

मात्रा: केवल बाहरी उपयोग के लिए। प्रभावित क्षेत्र पर दिन में 1-2 बार पतली परत लगाएं, या चिकित्सक के निर्देशानुसार।

भंडारण: ठंडी, सूखी जगह पर एयरटाइट काँच के जार में रखें।

सावधानी: खुले या रक्तस्राव वाले घावों पर न लगाएं, जब तक डॉक्टर ने विशेष अनुमति न दी हो। उपयोग के बाद हाथ धोएं।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

सिक्था तैल – त्वचा की रक्षा परत को मजबूत करता है, नमी बनाए रखता है और अन्य घटकों को गहराई तक पहुंचाता है।

शुद्ध गंधक – स्केल को ढीला करता है, एक्जिमा-समान जलन को कम करता है और Staphylococcus एवं Propionibacterium जैसे बैक्टीरिया को मारता है।

गिरिसिंदूर – सूजन-रोधी तथा एंटी-माइक्रोबियल गुण देता है, जलन वाले घाव को सुखाता है।

शुद्ध तंकारा – हल्का क्षारीय क्लेंज़र, सतह के रोगाणु कम करता है और फंगस को रोका जा सकता है।

घनासारका (कंफर) – ठंडक रिसेप्टर को सक्रिय करके खुजली कम करता है और कुछ फंगस व बैक्टीरिया को रोकता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

गंधक का एंटी-बैक्टीरियल और स्केल-ब्रेकर प्रभाव कई प्रयोगशाला अध्ययनों में सिद्ध हुआ है।

कंफर की ठंडक अनुभूति नसों के ठंडे रिसेप्टर को सक्रिय करती है, जिससे खरोंच की इच्छा घटती है।

बोरैक्स के एंटी-फंगल गुण प्रयोगशाला स्तर पर दर्ज हैं, इसलिए यह कुछ क्रीम में फंगस रोकने के लिए जोड़ा जाता है।

तेल-आधारित बेस त्वचा की बाधा को सुधारता है और सक्रिय घटकों को बेहतर अवशोषण देता है।

एक साथ, ये सामग्रियां निम्नलिखित में सहायता करती हैं:

  • सफाई – मृत कोशिकाएँ और रोगजनक हटते हैं।
  • सूजन-कम – लालिमा और दर्द घटता है।
  • खुजली-शांत – खुजली की तीव्रता घटती है, जिससे घावों पर हाथ नहीं लगते।
  • त्वचा-पुनरुज्जीवन – नमी और पोषक तत्वों के कारण त्वचा स्वस्थ और मुलायम बनती है।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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