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आयुर्वेदिक औषधि

ड्राक्षा-आदि-गुटिका

संदर्भ: योगरत्नाकर, अम्लपित्तचिकित्सा पृष्ठ ७०३

ड्राक्षा-आदि-गुटिका एक पुरानी आयुर्वेदिक दवा है जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद करती है। इसमें ड्राक्षा (किशमिश), हरितकी (टर्मिनलिया चेबुला) और गुड़ जैसे सरल घटक होते हैं। यह तेज़ अम्लता, छाती या गले में जलन, बहुत प्यास, कभी-कभी चक्कर और पाचन खराबी के लक्षणों से राहत देती है।

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उपयोग और लाभ

  • अम्लपित्त (हाइपरएसिडिटी) – तेज़ अम्लता, खट्टी डकार और पेट की असहजता को कम करता है।
  • हृद्दाह (छाती में जलन) – छाती में जलन की अनुभूति को शांत करता है।
  • कण्ठदाह (गले में जलन) – गले में जलन और गर्मी को कम करता है।
  • तृष्णा (अधिक प्यास) – असामान्य प्यास को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  • मूर्च्छा/भ्रम (चक्कर, बेहोशी) – चक्कर और बेहोशी की स्थिति में सहायक।
  • अग्निमांद्य (पाचन धीमा) – पाचन अग्नि को तेज़ करके भूख और पाचन में सुधार करता है।
  • आमवात (रूमेटिज़्म-जैसे दर्द) – जोड़ों के दर्द में राहत प्रदान करता है जो चयापचय असंतुलन से जुड़ा हो।

मुख्य सामग्री

  • ड्राक्षा (किशमिश) – *Vitis vinifera* – 1 भाग
  • हरितकी – *Terminalia chebula* – 1 भाग
  • गुड़ – *Saccharum officinarum* – 1 भाग

खुराक और अनुपान

मात्रा: 6 ग्राम से 12 ग्राम प्रतिदिन, दो-तीन बार विभाजित करके गुनगुने पानी के साथ लें। खुराक का निर्धारण हमेशा योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से करें।

भंडारण: गोलियों को ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर एयरटाइट कंटेनर में रखें। नमी से बचाएँ ताकि दवा की प्रभावशीलता बनी रहे।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

ड्राक्षा (किशमिश) – मीठा और ठंडा फल होने के कारण पित्त (Pitta) को शांत करता है। यह पेट की जलन और छाती-गले की जलन को कम करता है। इसके प्राकृतिक शर्करा और पॉलीफेनॉल्स शरीर को पोषण देते हैं।

हरितकी – आयुर्वेद में एक प्रसिद्ध पाचक औषधि है। यह पाचन अग्नि को तेज़ करती है, आमा (विषाक्त पदार्थ) को बाहर निकालती है और नियमित मल त्याग में मदद करती है। यह वात और पित्त को संतुलित रखने में भी सहायक है।

गुड़ – मिठास प्रदान करता है, जिससे दवा का स्वाद बेहतर होता है। यह जलन वाले ऊतकों को आराम देता है और अन्य घटकों को पाचन तंत्र तक पहुँचाने में मदद करता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

ड्राक्षा में रेज़वेराट्रॉल और फ्लेवोनॉइड्स होते हैं, जो एंटी-ऑक्सिडेंट और सूजन-रोधी गुणों से युक्त होते हैं। ये पेट की परत में सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।

हरितकी में टैनिन और चेबुलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होते हैं। शोध से पता चलता है कि ये यौगिक गैस्ट्रिक लाइनिंग की रक्षा करते हैं और अम्ल स्राव को नियंत्रित कर सकते हैं।

गुड़ त्वरित ऊर्जा प्रदान करता है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए ताकि अतिरिक्त शर्करा से बचा जा सके।

साथ में ये लाभ देते हैं

  • छाती-गले की जलन को कम करना – ठंडे और मीठे घटक पित्त को शांत करते हैं।
  • पाचन सुधारना – हरितकी अग्नि को तेज़ करती है, जिससे भोजन जल्दी पचता है।
  • असामान्य प्यास और चक्कर कम करना – शरीर का ताप संतुलन बनाए रखता है।
  • जोड़ दर्द में हल्की राहत – आमा को बाहर निकालकर जोड़ों में जमा विष को कम करता है।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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