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आयुर्वेदिक औषधि

बोलादि वटी

संदर्भ: सिद्धयोगसंग्रह, स्त्रीरोगाधिकार, 10:7

बोलादि वटी महिलाओं के मासिक धर्म की समस्याओं के लिए बनायी़ गयी आयुर्वेदिक गोली है। यह चक्र को नियमित करने, दर्द वाले पीरियड (डायसमेनोरेया) को कम करने और छूटे हुए माह को फिर से शुरू करने में मदद करती है। गोली केवल मासिक धर्म के दूसरे आधे भाग में ही ली जाती है। उपयोग से पहले हमेशा योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।

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बोलादि वटी image

उपयोग और लाभ

आर्तवदोष (मासिक धर्म की अनियमितता):

अनियमित पीरियड: यह आर्तव अनियमितता को दूर करने और छूटे हुए माह को फिर से शुरू करने में सहायक है।

खुराक: 1-2 टैबलेट (150-500 mg) दिन में दो बार, केवल दूसरे आधे भाग में। अनुपान: गुनगुना पानी या शहद के साथ।

कष्टार्तव (दर्द-भरा पीरियड) :

दर्द वाला पीरियड (Dysmenorrhoea): दर्दनाक मासिक धर्म और संबंधित असुविधा से राहत प्रदान करती है। खुराक: उपरोक्त अनुसार ही।

अनुपान: उपरोक्त अनुसार। दवा को केवल माह के दूसरे आधे भाग में ही लें, पूरे चक्र में लगातार नहीं।

भंडारण: सूखे, हवादार जगह में airtight कंटेनर में रखें।

मुख्य सामग्री

हिराबोल (फल): मीर्ह (Myrrh) — 2 भाग — यह रक्त को ठंडा कर, अत्यधिक रक्तस्राव को कम करता है।
शुद्ध सुहागा (शुद्ध बोरॉक्स): बोरॉक्स — 1 भाग — शरीर से वह विषाक्त पदार्थ हटाता है जो चक्र में बाधा डालते हैं।
कसीसा (हरी जस्ता): फ़ेरस सल्फ़ेट (ग्रीन विट्रिओल) — 1 भाग — लोहा देता है, जिससे रक्त स्वास्थ्य बेहतर बनता है।
हिंगु (असाफ़ोएडिटा): असाफ़ोएडिटा — 1 भाग — गर्म, ऐंटीस्पाज़्मोडिक; गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम देता है और दर्द घटाता है।
एलुवां (एलोवेरा पत्ते का अर्क): एलोवेरा — 1 भाग — शांत करने वाला, सूजन को कम करने वाला।
जटामांसी क़वाथ (जटामांसी का काढ़ा): जटामांसी (Spikenard) — जितना पेस्ट बन सके उतना — मन को शांति देता है, तनाव‑से‑जुड़ी पीरियड की परेशानी को घटाता है।

खुराक और अनुपान

मात्रा: 150 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम (सामान्यतः 1 से 2 गोली दिन में दो बार)

संग्रहण: ठंडी व सूखी जगह में वायुरोधी पात्र में रखें। सही तरीके से संग्रहित करने पर यह औषधि अनिश्चित काल तक शक्ति बनाए रखती है।

विशेष नोट: बोलादि वटी को पूरे रजोचक्र में नहीं लेने की सलाह दी जाती है। सामान्यतः इसे केवल चक्र के उत्तरार्ध में लेने की सलाह दी जाती है। इस औषधि में शुद्ध खनिज घटक होते हैं और इसे केवल किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में लेना चाहिए।

अन्य दवाओं के साथ: यदि चिकित्सक ने आयुर्वेदिक और एलोपैथिक दोनों दवाइयाँ लेने की सलाह दी है तो पहले एलोपैथिक दवा लें, 30 मिनट प्रतीक्षा करें, फिर 15-30 मिनट बाद आयुर्वेदिक औषधि लें।

बोलादि वटी एक शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्यतः महिलाओं के मासिक धर्म संबंधी विकारों के उपचार में उपयोग की जाती है। यह वटी रक्त को शुद्ध करने, चक्र को नियमित करने और दर्द को कम करने में सहायक है।

आयुर्वेद में बोलादि वटी का उल्लेख स्त्री रोग चिकित्सा के संदर्भ में मिलता है। इसके घटक द्रव्य : हिराबोल, शुद्ध सुहागा, कसीसा, हिंगु, एलुवां, और जटामांसी क्वाथ , मिलकर गर्भाशय को बल देते हैं, रक्तस्राव को संतुलित करते हैं और दर्द को शांत करते हैं।

यह औषधि विशेष रूप से आर्तवदोष (मासिक धर्म की अनियमितता) और कष्टार्तव (दर्दनाक माहवारी) में प्रभावी मानी जाती है। इसे केवल मासिक धर्म के दूसरे आधे भाग में लेने की सलाह दी जाती है।

किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का उपयोग करने से पूर्व योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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