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आयुर्वेदिक औषधि

अर्क वटी

संदर्भ: सिद्धभेषजमणिमाला, अग्निमांद्याधिकिकित्सा 254

अर्क वटी एक आयुर्वेदिक टैबलेट है जो पेट की अग्नि को तेज़ करने में मदद करती है। यह ख़ासकर कफज अग्निमांद्य (कफ-अधिकता से पाचन अँगार कमजोर होना) को सुधारती है। काली नमक, काली मिर्च और कैलोट्रोपिस गिगैंटेआ के फूल की समान मात्रा मिलाकर बनाई गई यह दवा भूख बढ़ाती, पचन को बेहतर बनाती और पेट में भारीपन को हटाती है।

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उपयोग और लाभ

कमज़ोर पाचन (कफज अग्निमांद्य) – पेट की अग्नि धुंधली, भूख कम।

पेट-भराव, भोजन-भरोसा, भूख-ग़ैर-हाज़िर (अजीर्ण, अरुची)।

मुख्य सामग्री

  • सौवर्चला (काली नमक) – 1 भाग
  • अर्कपुश्प (कैलोट्रोपिस गिगैंटेआ का फूल) – 1 भाग
  • मरिच (काली मिर्च) – 1 भाग

खुराक और अनुपान

मात्रा: 125 मिलीग्राम (एक टैबलेट), दिन में एक या दो बार गरम पानी के साथ।

भंडारण: हवा-बंद कंटेनर में रखें, नमी से दूर।

अवधि: आमतौर पर एक महीने तक, जब तक आयुर्वेदिक चिकित्सक न कहें।

सावधानी: यदि आप आधुनिक दवाएँ ले रहे हैं, तो उन्हें लेने के 30 मिनट बाद आर्का वाटी लें।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

सौवर्चला (काली नमक) – गर्म और तेज़ होती है, जिससे कफ की मोटी-सी लिपी कम होती है और पेट में स्राव (लालायन) बढ़ता है। यह हल्की-सी लवणता देता है जिससे जीभ में जलन महसूस होती है और भूख जागती है।

अर्कपुश्प (कैलोट्रोपिस गिगैंटेआ के फूल) – गर्म और रगड़-जैसा असर देता है, इसलिए पेट-भारीपन, उलझन-भरे अमा (अवशोषित अपशिष्ट) को हटाता है। यह अग्नि को पुनः उत्तेजित करता है।

मरिच (काली मिर्च) – आयुर्वेद में दीपन-पाचन (भूख-जागरण-और-पचन) का प्रमुख मसाला है। यह पाचक एंजाइमों को तेज़ करता, गैस-पीड़ा घटाता और कुल मिलाकर पाचन-तंत्र को 'चलता-चलता' बनाता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

पाइपरिन (काली मिर्च में मुख्य यौगिक) – पैंक्रियास की एंजाइम उत्पादन बढ़ाता, आंतों की गति (परिसर) को सुधरता, सूजन-रोधी प्रभाव देता और अन्य पोषक-तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है।

कैलोट्रोपिस गिगैंटेआ के फूल में फ्लैवोनोइड्स – प्रयोगशाला में एंटी-ऑक्सिडेंट और हल्के सूजन-रोधी गुण दिखाते हैं। इसका लेटेक्स (द्रव) नहीं, बल्कि फूल उपयोग किया जाता है, इसलिए सामान्य मात्रा में जलन नहीं होती।

चट्टान-नमक – सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे माइक्रो-खनिज प्रदान करता है, जो इलेक्ट्रोलाइट-संतुलन में मदद करता और लार में स्टार्च-डाइजेसिंग एंजाइम (एमाइलेज) के उत्पादन को उत्तेजित करता है।

एक साथ, ये सामग्रियां निम्नलिखित में सहायता करती हैं:

  • भूख बढ़ाना और खाने की इच्छा जागरूक करना।
  • भोजन को जल्दी-जल्दी तोड़-कर पोषक-तत्वों का अवशोषण तेज़ करना।
  • पेट-भारीपन, फुंसी, अपच-की-भावना को कम करना।
  • कफ-आधारित पाचन-समस्या वाले लोगों में वजन-वृद्धि को समर्थ बनाना।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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