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आयुर्वेदिक औषधि

आमावाटारी रस

संदर्भ: भैषज्यरत्नावली, आमावाताधिकार १८०-१८१

आमावाटारी रस एक पारंपरिक आयुर्वेदिक रस-योग है, जिसमें शुद्ध पारद, गंधक, गुग्गुलु और त्रिफला जैसे घटकों का मिश्रण होता है। यह बढ़े हुए वात-दोष को शांत करके जोड़ों की सूजन, दर्द और कड़वाहट को कम करता है।

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उपयोग और लाभ

आमावाट (रूमेटिज़्म/आरए) – जोड़ों के दर्द, सूजन और कड़वाहट को कम करता है।

वात-संबंधित सूजन रोग जैसे गठिया, ज्वर और जोड़ों की विकृति में मदद करता है।

पाचन और अग्नि को सुधारता है, जिससे शरीर से विष (अमा) का उत्सर्जन आसान होता है।

मुख्य सामग्री

  • शुद्ध पारद (पारा) – पारा, जिसे शोधन प्रक्रिया से शुद्ध किया गया है।
  • गंधक – सल्फर, जो सूजन कम करने में मदद करता है।
  • गुग्गुलु – Commiphora mukul, जो वात-दोष को संतुलित करता है।
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  • बिभीता – Terminalia bellirica, जो विषहरण में मदद करता है।
  • आमलकी – Emblica officinalis, जो रसायन गुणों से भरपूर है।
  • सिट्रका (चित्रक) – Plumbago zeylanica, जो अग्नि को बढ़ाता है।

खुराक और अनुपान

खुराक: 500 mg से 1.5 g तक, गंभीर मामलों में। आमतौर पर 750 mg टैबलेट, दिन में एक या दो बार गुनगुने पानी या एरंड तेल के साथ।

परिचय

आमावाटारी रस एक पुरानी आयुर्वेदिक दवा है, जिसे पहले आमावाट (रूमेटाइड गठिया) के इलाज में इस्तेमाल किया जाता था। आज इसे गठिया और अन्य जोड़ों की सूजन वाली बीमारियों में उपयोग किया जाता है। यह रस-योग (खनिज-जड़ी-बूटी मिश्रण) शुद्ध पारद को जड़ी-बूटियों और तेल के साथ मिलाता है। यह बढ़े हुए वात-दोष को शांत करता है, जोड़ों की सूजन कम करता है और चलने-फिरने में मदद करता है।

आमावाटारी रस रूमेटिज़्म के लिए क्यों असरदार है?

वाता का संतुलन – पारद, गंधक और गुग्गुलु मिलकर गहरी 'अग्नि' बनाते हैं। यह बढ़े हुए वात को शांत करता है, जिससे जोड़ों का दर्द कम होता है।

अमा-हटाने वाला काम – हरितकी, बिभीता और आमलकी (त्रिफला) पाचन को ठीक करते हैं। अमा (विष) कम होता है और सूजन घटती है।

अग्नि-बढ़ाने वाला सिट्रका – वाहीनी (सिट्रका) पेट की अग्नि तेज़ करता है। इससे शरीर के अपशिष्ट जल्दी बाहर निकलते हैं, जो पुरानी सूजन रोगों में आवश्यक है।

गहरे ऊतक तक पहुँच – गंधक-समृद्ध आधार एरंडा तेल के साथ मिलकर रस को गहरी हड्डी और जोड़ तक ले जाता है, जहाँ यह सीधे कार्य करता है।

रसयाना प्रभाव – लगातार लेने से जोड़ों की हड्डी मजबूत होती है और आगे गिरावट कम होती है। इन सभी सिद्धांतों के संयोग से शास्त्र कहता है: 'आमावाटारी रस दुष्ट वाता को निवारित करता है, सूजन घुलाता है और सामान्य जोड़ कार्य को बहाल करता है।'

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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