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आयुर्वेदिक औषधि

अकीका भस्म

संदर्भ: रसोद्धारतन्त्र, भस्म पिष्टि प्रकरण 1-4

अकीका भस्म एक खनिज-आधारित आयुर्वेदिक दवा है, जिसका मुख्य घटक शुद्ध अगेट (सिलिकॉन डाइऑक्साइड) है। इसे एलो वेरा, गुलाब जल और पेंडन पत्ते के रस में पिघलाकर कई बार गरम किया जाता है, जिससे एक बहुत बारीक पाउडर बनता है। परम्परागत रूप से यह दवा हृदय को ताकत देती है, शरीर की अधिक गरमी को शांत करती है, पाचन में मदद करती है, खाँसी-सांस की समस्याओं को दूर करती है, थकान घटाती है और कुछ आँखों की बीमारियों में सहायक मानी जाती है।

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उपयोग और लाभ

हृदय-संबंधी कमजोरी (हृद्रोग), उच्च रक्त-चाप (रक्तचाप), एसिड रिफ्लक्स/हार्टबर्न (अम्लपित्त), पाचन-गड़बड़ी (अग्निमांद्य), खाँसी-सांस की समस्या (कास), थकान-कमजोरी (दौर्बल्य), तनाव-सिरदर्द (मानसिक पीड़ा), अत्यधिक मासिक रक्तस्राव (रक्तप्रदर), आँखों की जलन (नेत्ररोग), यकृत-प्लीहा समर्थन (यकृत-प्लीहा विकार)।

मुख्य सामग्री

  • अकीका (भस्म) — अगेट (सिलिकॉन डाइऑक्साइड) — शरीर में पित्त (गरमी) को घटाता है, ठंडक देता है।
  • कुमारी (एलो वेरा रसाय) — एलो वेरा — पेट की गर्मी को शांत करता है, आँतों को मुलायम बनाता है।
  • गुलाब जल — गुलाब का पानी — नरम ठंडक देता है, रक्त-पित्त को संतुलित रखता है।
  • केतकी (पेंडन पत्ता रस) — पेंडन पत्ता — छाती में जलन को कम करता है।
  • लंबी मिर्च — पाइपर लोंगम् — श्वास मार्ग को खुला रखती है, सूजन घटाती है।
  • केला की जड़ — बनाना स्टेम — इलेक्ट्रोलाइट संतुलन में मदद करती है, ऊर्जा बनाए रखती है।

खुराक और अनुपान

खुराक: 125 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम तक, दिन में एक या दो बार। इसे शहद, अश्वगंधा पाउडर या ताज़ा अदरक के रस के साथ लें। भंडारण: सूखे, हवादार काँच या मिट्टी के बर्तन में रखें; नमी और गर्मी से बचाएँ।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

अकीका भस्म का मुख्य घटक अगेट (सिलिकॉन डाइऑक्साइड) एक ठंडा और स्थिर पदार्थ है। यह शरीर में पित्त (गरमी) को कम करता है, जिससे हृदय, पेट और सांस-मार्ग में जलन घटती है। एलो वेरा रस पेट की गर्मी को शांत करता है, जबकि गुलाब जल और पेंडन पत्ता रस अतिरिक्त ठंडी शक्ति जोड़ते हैं। यदि लंबी मिर्च या केला-तना मिलाया गया हो, तो वह श्वास-मार्ग को खुला रखने और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बेहतर करने में मदद करता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

सिलिकॉन डाइऑक्साइड (अगेट) निष्क्रिय है, इसलिए यह अन्य जड़ी-बूटियों के सक्रिय घटकों को सुरक्षित रखता है। एलो वेरा के पॉलीसैकेराइड एंटी-ऑक्सिडेंट होते हैं, जो आँत की परत को बचाते हैं। पाइपरिन (लंबी मिर्च से) सूजन-रोधी है और सांस-मार्ग को साफ़ रखता है। केला-तना में पोटैशियम होता है, जो शरीर में जल-संतुलन बनाए रखता है। इन कारणों से परम्परागत उपयोग (हृदय-सुदृढ़ीकरण, पाचन-संतुलन, खाँसी-निवारण) कुछ हद तक समझ में आता है, परन्तु अभी तक पूरी पुष्टि नहीं हुई है।

ये सामग्रियां क्या करती हैं

हृदय-मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं – ठंडा भस्म पित्त (गरमी) को घटाता है, जिससे दिल पर दबाव कम होता है। पेट-आँत की जलन घटाती हैं – एलो वेरा और गुलाब जल मिलकर एसिड-बर्न को शांत करते हैं। श्वास-मार्ग साफ़ करती हैं – लंबी मिर्च और पेंडन पत्ता का रस स्राव को नियंत्रित करके खाँसी घटाते हैं। शारीरिक ऊर्जा बढ़ाती हैं – सभी घटक मिलकर शरीर में संतुलन बनाते हैं, थकान और तनाव कम होते हैं।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

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Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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