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आयुर्वेदिक औषधि

अग्निमुख चूर्ण

संदर्भ: योगरत्नाकर, अजीर्णचिकित्सा: १-६

अग्निमुख चूर्ण एक आयुर्वेदिक पाउडर है जो पेट की आग (अग्नि) को जलाकर भूख बढ़ाता और पाचन को तेज़ करता है। यह अपचन, पेट में फूलना, कब्ज, बिन‑खून वाले बवासीर और पेट दर्द जैसी समस्याओं में आराम देता है। विशेषकर वात और कफ से जुड़ी पेट की समस्याओं में यह अत्यंत उपयोगी है।

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उपयोग और लाभ

अग्निमुख चूर्ण का उपयोग निम्नलिखित समस्याओं में किया जाता है:

  • अपच (अजीर्ण)
  • पेट में फूलना / ऊपरी गैस (उदावर्त)
  • भूख न लगना (अनोरेक्सिया)
  • प्लीहा संबंधी रोग (प्लीह रोग)
  • पेट दर्द / कोलिक (शूल)
  • बिन-खून वाला बवासीर (अर्श)
  • पेट में गाँठ / सूजन (गुल्मा)
  • खांसी या सांस की तकलीफ़ (कास/स्वास)
  • धीमा वजन घटना / कमजोरी (क्षय)

मुख्य सामग्री

अग्निमुख चूर्ण में निम्नलिखित जड़ी-बूटियाँ शामिल हैं:

  • हिंग (भांग) – Ferula assa-foetida – 1 भाग
  • पिप्पली (लंबी मिर्च) – Piper longum – 1 भाग
  • सुखी अदरक – Zingiber officinale – 1 भाग
  • अजवाइन (यवणाक) – Trachyspermum ammi – 1 भाग
  • वक (शुगर-फ्लैग) – Cyperus rotundus – 1 भाग
  • हरितकी – Terminalia chebula – 1 भाग
  • सिट्राका (लीडवर्ट) – Plumbago zeylanica – 1 भाग
  • कुश्ठ (कोस्टस) – Saussurea costus – 1 भाग

खुराक और अनुपान

खुराक: 3 ग्राम से 6 ग्राम (लगभग ½ से 1 चम्मच) गर्म पानी के साथ दिन में एक या दो बार लें। भूख न लगने पर भोजन से पहले लें।

उपचार की अवधि: आमतौर पर 1 से 3 सप्ताह तक, या चिकित्सक की सलाह अनुसार।

भंडारण: ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर एयरटाइट डिब्बे में रखें।

मुख्य घटक

अग्निमुख चूर्ण में निम्नलिखित जड़ी-बूटियाँ शामिल हैं:

  • हिंग (भांग) – Ferula assa-foetida – पेट की गैस कम करता है, आँतों की मरोड़ घटाता है।
  • पिप्पली (लंबी मिर्च) – Piper longum – भूख बढ़ाता है, पाचक एंजाइमों को सक्रिय करता है।
  • सुखी अदरक – Zingiber officinale – शरीर को गर्म करता है, मतली कम करता है, भोजन को जल्दी पचाता है।
  • अजवाइन (यवणाक) – Trachyspermum ammi – फूलना-फुलाव घटाता है, भारी भोजन को आसानी से पचाता है।
  • वक (शुगर-फ्लैग) – Cyperus rotundus – भूख जाग्रत करता है, पेट की जलन दूर करता है।
  • हरितकी – Terminalia chebula – हल्का कसाव देता है, मल को नियमित बनाता है।
  • सिट्राका (लीडवर्ट) – Plumbago zeylanica – जमी हुई तम (आमा) साफ करता है, पाचन को तेज़ करता है।
  • कुश्ठ (कोस्टस) – Saussurea costus – वात को शांत करता है, पेट दर्द कम करता है, प्लीहा को मजबूत बनाता है।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

प्रत्येक घटक का अपना विशेष लाभ है:

  • हिंग – गैस-बाद, ऐंठन-कम करता है, वात-कफ को संतुलित करता है।
  • वक – भूख को जगाता है, सुस्त दिमाग को दूर करता है।
  • पिप्पली – भूख बढ़ाता है, पचन-सहायक; पोषक तत्वों को बेहतर अवशोषित करता है।
  • सुखी अदरक – शरीर को गर्मी देता है, मतली घटाता है, पेट-भड़क कम करता है।
  • अजवाइन – फूलना-फुलाव घटाता है, भारी भोजन जल्दी पचाता है।
  • हरितकी – हल्का कसाव देता है, मल को नियमित बनाता है।
  • सिट्राका – जमी हुई तम (आमा) साफ करता है, पाचन-आग तेज़ करता है।
  • कुश्ठ – वात-शांत, कोलिक-दर्द कम, प्लीहा-स्वास्थ्य बढ़ाता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

आधुनिक विज्ञान ने इन जड़ी-बूटियों के प्रभावों की पुष्टि की है:

  • हिंग – सल्फर-युक्त यौगिक एंटी-स्पास्मोडिक और एंटी-फ्लैट्यूलेंट प्रभाव दिखाते हैं, जिससे पेट-फूलना कम होता है।
  • अदरक – जिंजरॉल और शोगॉल गैस्ट्रिक ख़ाली होने की गति बढ़ाते हैं, मतली कम करते हैं।
  • पिप्पली – पिपेरीन पोषक तत्वों की बायो-उपलब्धता बढ़ाता है और पाचक एंजाइमों को उत्तेजित करता है।
  • हरितकी – टैनिन और फेनोलिक पदार्थ एंटी-ऑक्सीडेंट और आँत-मोटिलिटी को नियंत्रित करते हैं।
  • अजवाइन – थायमोल एंटी-बैक्टीरियल और कार्मिनेटिव प्रभाव रखता है, गैस कम करता है।
  • सिट्राका – प्लंबैजिन पाचक रसायनों को उत्तेजित करता है और हल्का चलाने वाला असर देता है।
  • कुश्ठ – कोस्टुनोलाइड्स एंटी-इन्फ्लेमेटरी और स्मूद-मसल-रिलैक्सिंग प्रभाव दिखाते हैं।

अधिकांश अध्ययन प्री-क्लिनिकल या छोटे मानव परीक्षणों पर आधारित हैं; इसलिए ये संकेत सहायक हैं, ठोस प्रमाण नहीं।

ये सामग्रियां एक साथ क्या करती हैं

इन जड़ी-बूटियों का संयोजन मिलकर निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है:

  • अग्नि को प्रज्वलित करना – गर्म करने वाली जड़ी-बूटियाँ (अदरक, पिप्पली, सिट्राका) पेट-आग को तेज़ करती हैं।
  • गैस-फूलना कम करना – कार्मिनेटिव जड़ी-बूटियाँ (हिंग, अजवाइन, अदरक) पेट-हवा को बाहर निकालती हैं।
  • नियमित मल त्याग – हल्का कसाव और मोटिलिटी-सहायक (हरितकी, सिट्राका, कुश्ठ) मल को नियमित रखती हैं।
  • पेट-दर्द को शांत करना – एंटी-स्पास्मोडिक और वात-शान्ति-कर (हिंग, कुश्ठ, अदरक) कोलिक-दर्द कम करती हैं।
  • भूख बढ़ाना – भूख-उत्जीवक (पिप्पली, वक) उन लोगों में भूख जाग्रत करते हैं जिनकी पाचन-आग कमजोर है।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

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