सामग्री: क्रियाएँ और लाभ
9 : 3 पारादादी लेपा में धातु-आधारित पदार्थ और जड़ी-बूटी के रस दोनों शामिल हैं।
धातु-भाग (पाराद, गंधक, ताला, दराद, मनःशिला, मृद्दारशंख) — यह घाव में मौजूद गंदगी, मृत ऊतक और रोगजनकों को हटाने में मदद करते हैं।
जड़ी-बूटी-भाग (तुलसी, धत्तूर, श्वेत जीरा) — यह पीत्त (अधिक गर्मी) को शांत करता है, दर्द कम करता है और रक्त-संचार बढ़ाता है।
घी — सभी घटकों को मिलाकर पेस्ट बनाता है और त्वचा पर आसानी से चिपकता है।
आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या
आधुनिक अध्ययनों में पाया गया है कि पाराद और गंधक के मिश्रण से बनी कज्जली (काली सल्फाइड) कुछ बैक्टीरिया और फंगस को रोकती है। सल्फर और इसके यौगिक केराटोलिटिक और एंटीसेप्टिक गुण दिखाते हैं। आर्सेनिक सल्फाइड्स में एंटीमाइक्रोबियल प्रभाव होता है, लेकिन इनके विषाक्तता के कारण सावधानीपूर्वक शुद्धिकरण आवश्यक है।
जीरे में क्यूमिनाल्डिहाइड होता है, जो सूजन-रोधी और जीवाणु-नाशक गुण दिखाता है। तुलसी के पत्तों में यूजेनॉल और अन्य फेनोलिक यौगिक होते हैं, जो जीवाणुरोधी और फंगसरोधी प्रभाव डालते हैं। धत्तूर के पत्तों में स्कोपोलामाइन जैसे एल्कलॉइड होते हैं, जो स्थानीय दर्द को सुन्न करते हैं।
इस मिश्रण से मिलने वाले लाभ
- घाव की सफाई — मृत ऊतक हटाना और रोगजनकों को कम करना।
- सूजन-नियमन — पीत्त को शांत करना और रक्त-संचार बढ़ाना।
- दर्द कम करना — स्थानीय दर्द को सुन्न करना।
- त्वचा की मरम्मत — शरीर की पुनर्निर्माण शक्ति को तेज करना।
