औषधियों पर वापस जाएं
आयुर्वेदिक औषधि

9 : 3 पारादादी लेपा

संदर्भ: योगरत्नाकर, उपदंशचिकित्सा 9 : 3 पारादादी लेपा

9 : 3 पारादादी लेपा एक आयुर्वेदिक पेस्ट है जिसका उपयोग केवल त्वचा पर बाहरी रूप से किया जाता है। यह योगरत्नाकर ग्रंथ में वर्णित है और परंपरागत रूप से अल्सर, जलने और नरम छाँट (सिफिलिस जैसी त्वचा की सूजन) को ठीक करने में मदद करता है। इसमें शुद्ध पारा, सल्फर, असरधातु-सल्फाइड, तुलसी और धत्तूर के रस को घी में मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है।

चूँकि इसमें भारी धातुएँ होती हैं, इसे केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही उपयोग किया जाना चाहिए।

जल्द आ रहा है

उपयोग और लाभ

  • नरम छाँट (सिफिलिस-समान रोग) — घाव को साफ और ठीक करने में मदद करता है।
  • पुराना अल्सर और घाव — मृत ऊतक हटाने और ऊतक की मरम्मत में सहायक।
  • जलने से हुए घाव — त्वचा को शांत करता है और रिकवरी में तेजी लाता है।

मुख्य सामग्री

  • पाराद (शुद्ध पारा) — 12 ग्राम
  • गंधक (शुद्ध सल्फर) — 12 ग्राम
  • ताला (शुद्ध पीली अरसेनिक सल्फाइड) — 12 ग्राम
  • दराद (शुद्ध किन्नर) — 12 ग्राम
  • मनःशिला (शुद्ध रियलगार) — 12 ग्राम
  • मृद्दारशंख (लिथरज) — 12 ग्राम
  • श्वेत जीरक (सफेद जीरा) — 24 ग्राम
  • तुलसी रस (तुलसी के पत्तों का रस) — आवश्यकता अनुसार
  • धत्तूर रस (धत्तूर के पत्तों का रस) — आवश्यकता अनुसार

खुराक और अनुपान

खुराक: टेबलेट को पीसकर गर्म घी के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं। प्रभावित क्षेत्र पर 1-2 ग्राम पेस्ट दिन में 2-3 बार लगाएं।

भंडारण: शेष टेबलेट को ठंडी, सूखी और एयरटाइट कंटेनर में रखें।

सामग्री: क्रियाएँ और लाभ

9 : 3 पारादादी लेपा में धातु-आधारित पदार्थ और जड़ी-बूटी के रस दोनों शामिल हैं।

धातु-भाग (पाराद, गंधक, ताला, दराद, मनःशिला, मृद्दारशंख) — यह घाव में मौजूद गंदगी, मृत ऊतक और रोगजनकों को हटाने में मदद करते हैं।

जड़ी-बूटी-भाग (तुलसी, धत्तूर, श्वेत जीरा) — यह पीत्त (अधिक गर्मी) को शांत करता है, दर्द कम करता है और रक्त-संचार बढ़ाता है।

घी — सभी घटकों को मिलाकर पेस्ट बनाता है और त्वचा पर आसानी से चिपकता है।

आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या

आधुनिक अध्ययनों में पाया गया है कि पाराद और गंधक के मिश्रण से बनी कज्जली (काली सल्फाइड) कुछ बैक्टीरिया और फंगस को रोकती है। सल्फर और इसके यौगिक केराटोलिटिक और एंटीसेप्टिक गुण दिखाते हैं। आर्सेनिक सल्फाइड्स में एंटीमाइक्रोबियल प्रभाव होता है, लेकिन इनके विषाक्तता के कारण सावधानीपूर्वक शुद्धिकरण आवश्यक है।

जीरे में क्यूमिनाल्डिहाइड होता है, जो सूजन-रोधी और जीवाणु-नाशक गुण दिखाता है। तुलसी के पत्तों में यूजेनॉल और अन्य फेनोलिक यौगिक होते हैं, जो जीवाणुरोधी और फंगसरोधी प्रभाव डालते हैं। धत्तूर के पत्तों में स्कोपोलामाइन जैसे एल्कलॉइड होते हैं, जो स्थानीय दर्द को सुन्न करते हैं।

इस मिश्रण से मिलने वाले लाभ

  • घाव की सफाई — मृत ऊतक हटाना और रोगजनकों को कम करना।
  • सूजन-नियमन — पीत्त को शांत करना और रक्त-संचार बढ़ाना।
  • दर्द कम करना — स्थानीय दर्द को सुन्न करना।
  • त्वचा की मरम्मत — शरीर की पुनर्निर्माण शक्ति को तेज करना।

चिकित्सा समीक्षक

Syed Aman Hussain

Reviewed By

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

View Profile →
परामर्श बुक करें