सामग्री: क्रियाएँ और लाभ
आयुर्वेद में पीरियड की समस्या को वात-पित्त का असंतुलन और पेट में जमा अमा (विष) कहा जाता है। 10 : 7 बोलाड़ी वटी के घटक इस असंतुलन को इस प्रकार सुधारते हैं:
- संकुचन-कारक (हिराबोल, कसीसा) – रक्त वाहिकाओं को सख्त बनाकर ज्यादा रक्तस्राव को रोकते हैं।
- शांत-कारक (एलुवां, हिराबोल) – श्रोणि के क्षेत्र में सूजन को कम करते हैं।
- ऐंटीस्पाज़्मोडिक (हिंगु) – गर्भाशय की मांसपेशियों को ढीला कर दर्द घटाता है।
- मन-शांत (जटामांसी क्वाथ) – तनाव कम करके पीरियड की समस्या हल्के करता है।
- शुद्धिकरण (शुद्ध सुहागा) – शरीर से वह अमा निकालता है जो सामान्य रक्तस्राव को रोकता है।
इन सभी क्रियाओं से चक्र प्राकृतिक रूप से फिर से चलने लगता है, बिना तेज बदलावों के।
आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या
आधुनिक अध्ययनों में इन घटकों के गुणों की पुष्टि की गई है:
- हिराबोल – सूजन घटाने और तनाव कम करने के गुण होते हैं, जिससे रक्तस्राव कम होता है।
- बोरॉक्स – रोगाणुरोधी असर रखता है, लेकिन शरीर में इस्तेमाल से पहले साफ़ करना ज़रूरी है।
- फ़ेरस सल्फ़ेट – आयरन का प्रमुख स्रोत है, थकान दूर करता है।
- हिंगु – स्पाज़्म और सूजन घटाने के कारण मासिक-धर्म के दर्द में राहत देता है।
- एलुवां – सूजन कम करता है, श्रोणि की जलन शांत करता है।
- जटामांसी – तनाव-रोधी और मन शांत करने वाला है, तनाव-से-बढ़े पीरियड को नियंत्रित करता है।
