निरगुंडी (Nirgundi) in Hindi
Botanical: Vitex negundo Linn.| English: Five-leaved Chaste Tree / Chinese Chaste Tree
निरगुंडी (Vitex negundo) एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है जो वात-कफशामक, शोथनाशक, दर्दनाशक और ज्वरनाशक गुणों से भरपूर है। इसे संधिवात, सीरदर्द, श्वास, मलशोथ, त्वचा रोग और स्त्री रोगों में उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में निरगुंडी के पत्ते, जड़, फल और तेल सभी औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयुक्त हैं।
Pure निरगुंडी (Nirgundi) in Hindi Root Extract
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Top Health Benefits
1संधिशोथ और दर्द में राहत
निरगुंडी में मौजूद आयरोप्ताता, निंबिओलाइड और बेटा-सिटोस्टेरॉल तत्व संधिवात, गठिया और अन्य संधिशोथ रोगों में सूजन और दर्द को कम करते हैं।
2श्वास रोगों में लाभदायक
निरगुंडी के पत्तों का क्वाथ कफ निःसरण, दमा, ब्रोंकाइटिस और श्वासनली की सूजन को कम करता है। यह वात-कफ दोष शामक होने से श्वास तंत्र को स्वस्थ रखता है।
3ज्वरनाशक और रोगाणुरोधी गुण
निरगुंडी में शक्तिशाली अग्निदीपक और अंटिबैक्टीरियल गुण होते हैं जो बुखार, मलेरिया और वायरल संक्रमणों में लाभदायक हैं। उष्ण वीर्य होने से यह ज्वर को शांत करता है।
4त्वचा रोगों में उपयोगी
निरगुंडी के पत्तों का लेप खुजली, कुष्ठ, एक्जिमा और अन्य त्वचा रोगों में लाभदायक है। इसका तेल सिर के शूल और ड्रैंडेफ में भी उपयोग होता है।
5स्त्री रोगों में सहायक
निरगुंडी के पत्तों का क्वाथ अनियमित रजोधर्म, कष्टार्तव, व्हाइट डिस्चार्ज और प्रसव बाद की समस्याओं में उपयोगी है। इसे स्तनपान बढ़ाने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।
Ayurvedic Properties
How to Consume?
निरगुंडी के सेवन की विधियाँ:
1. क्वाथ (काढा): निरगुंडी के पत्तों का क्वाथ 10-20 ml दिन में दो बार लिया जाता है।
2. तेल मालिश: निरगुंडी तेल को प्रभावित स्थान पर लगाने से संधिवात, सिरदर्द और त्वचा रोगों में राहत मिलती है।
3. चूर्ण (Powder): निरगुंडी जड़ का चूर्ण 3-5 gm शहद या गर्म जल के साथ लिया जा सकता है।
4. पत्तों का लेप: ताज़े पत्तों को पीसकर सूजन पर बाह्य रूप से लगाया जा सकता है।
5. निरगुंडीडी तेल / घृत: चिकित्सक के परामर्श से आयुर्वेदिक प्रपरेशन के रूप में उपयोग करें।
निरगुंडी: वानस्पतिक परिचय और फाइटोकेमिकल शोध
वानस्पतिक पहचान:
निरगुंडी वर्बेनेसी परिवार का बहुवर्षीय क्षुप है जो 5 मीटर तक उंचा होता है। पत्ते हस्त-विन्यासी होते हैं जिनमें प्रयेक पत्ता 3-5 पत्रिकाओं में विभक्त होता है। फूल नीले-बैंगनी रंग के होते हैं। यह भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल और दक्षिण-पूर्व एशिया में सल्तानों, नदियों के किनारों और वन क्षेत्रों में पाया जाता है।
मुख्य फाइटोकेमिकल घटक:
निरगुंडी में निंबिओलाइड, आयरोप्ताता (flavonoids), विटेक्सिलाक्टोन, सेस्क्विटर्पीन, होरसिबिलिन और बीटा-सिटोस्टेरॉल पाए जाते हैं। उड़नशील तेल में सबनीन और सेस्क्विटर्पीन आदि संघटक होते हैं जो शोथनाशक प्रभाव के लिए उत्तरदायी हैं।
आयुर्वेद की शास्त्रीय योजनाएँ:
निरगुंडी के महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक योग हैं: निरगुंडी तेल, निरगुंडी घृत, निरगुंडी क्वाथ और निरगुंडादि तेल। भावप्रकाश में निरगुंडी को 'वातस्ंहारिणी' कहा गया है जो वातज रोगों की श्रेष्ठ औषधि है।
आधुनिक शोध की समीक्षा:
आधुनिक वैज्ञानिक शोधों ने निरगुंडी के COX-2 अवरोधक (anti-inflammatory), अंटिऑक्सिडेंट, अंटिमाइक्रोबियल और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण प्रमाणित किए हैं। निरगुंडी शोथनाशक प्रभाव में NSAID दवाओं से तुलनीय पाया गया है।
Side Effects & Cautions
निरगुंडी के संभावित दुष्प्रभाव और सावधानियाँ:
1. गर्भावस्था में सावधानी: गर्भवती महिलाओं को निरगुंडी का सेवन सिर्फ चिकित्सकीय परामर्श से करना चाहिए।
2. अतिसेवन से पित्त प्रकोप: उष्ण वीर्य होने से अधिक मात्रा में सेवन से अम्लपित्त, जलन और असिडिटी हो सकती है।
3. एलर्जी: कुछ लोगों को निरगुंडी से त्वचा पर एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है। उपयोग से पहले पैच टेस्ट करें।
4. दवाई के साथ संवाद: निरगुंडी कुछ दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकती है, इसलिए अन्य दवाई ले रहे हों तो चिकित्सक से सलाह लें।
5. आंतरिक सेवन सीमा: वयस्कों के लिए सात्विक मात्रा 3-5 gm प्रतिदिन से अधिक न लें।
Frequently Asked Questions
निरगुंडी क्या है?▼
निरगुंडी (Vitex negundo) एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है जिसे संस्कृत में 'निर्गुण्डी' कहा जाता है। इसके पत्ते, जड़, फल और तेल आयुर्वेद में शोथ, दर्द, श्वास और स्त्री रोगों के उपचार में प्रयुक्त होते हैं।
निरगुंडी का आयुर्वेदिक गुण क्या है?▼
निरगुंडी तीखा, कड़वा, कसैला रस, लघु रूक्ष गुण, उष्ण वीर्य, कटु विपाक है। यह वात-कफ शामक, शोथनाशक, दर्दनाशक और ज्वरनाशक है।
निरगुंडी का सेवन किस रोग में सहायक है?▼
निरगुंडी संधिवात, दमा, खांसी, बुखार, नसों की सूजन, कौशिक दर्द, त्वचा रोग और स्त्री रोगों में उपयोगी है।
निरगुंडी का सेवन कितनी मात्रा में किया जाए?▼
सामान्यतः निरगुंडी जड़ चूर्ण 3-5 gm, पत्तों का क्वाथ 10-20 ml दिन में दो बार लिया जाता है। सटीक मात्रा के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें।
क्या निरगुंडी गर्भावस्था में सुरक्षित है?▼
गर्भावस्था में निरगुंडी का सेवन सावधानी से करना चाहिए। इसके उष्ण वीर्य कारण अधिक सेवन से गर्भीनी महिलाओं में समस्या हो सकती है। आयुर्वेदिक वैद्य से परामर्श अवश्य लें।
Scientific References
1. Singh, V. & Kaur, S. (2020). Anti-inflammatory and analgesic properties of Vitex negundo: A review. Journal of Ayurveda and Integrative Medicine, 11(2), 145-152.
2. Bharthi, S. et al. (2018). Phytochemical composition and biological activity of Vitex negundo L. Asian Pacific Journal of Tropical Biomedicine, 8(4), 183-190.
3. Charaka Samhita - Sutrasthana 4:13. Nirgundi (Vitex negundo) vata-kaphahara properties.
4. Sushruta Samhita - Chikitsa Sthana 4:6. Nirgundi in Vatarakta and Shotha chikitsa.
5. Ashtanga Hridayam - Sutrasthana 15:22. Nirgundi taila prayoga for Sandhivata.
Article Reviewed By

Syed Aman Hussain
BAMS, MD
Dr. Syed Aman Hussain is a dedicated Ayurvedic physician specializing in the ancient science of detoxification and rejuvenation. An alumnus of the highly esteemed Ayurvedic and Unani Tibbia College, Government of NCT of Delhi, he holds a degree in Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery (BAMS).

