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कोदो बाजरा

Botanical: Paspalum scrobiculatum| English: Kodo Millet

कोदो बाजरा, जिसे आयुर्वेद में कोद्रवः के नाम से जाना जाता है, एक प्राचीन और पौष्टिक अनाज है जो सूखे की स्थिति में भी उग सकता है। यह भारत के मैदानी इलाकों में व्यापक रूप से उगाया जाता है और इसके दानों में पोषक तत्वों की भरमार होती है। आयुर्वेद में इसे कफ और पित्त दोष को संतुलित करने वाला माना गया है, लेकिन इसका रूक्ष (सूखा) और गुरु (भारी) स्वभाव वात दोष को बढ़ा सकता है। इसका मीठा और कसैला स्वाद पाचन को सुधारता है और मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखता है।

Pure कोदो बाजरा Root Extract

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Top Health Benefits

1पाचन तंत्र के लिए वरदान

रेजिस्टेंट स्टार्च का खजाना: कोदो बाजरा में लगभग 30% रेजिस्टेंट स्टार्च होता है, जो कोलन में फर्मेंट होकर ब्यूटिरेट बनाता है। यह ब्यूटिरेट कोलन की कोशिकाओं के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और सूजन कम होती है। आयुर्वेद में इसे पाचन अग्नि (अग्नि) को बढ़ाने वाला माना गया है, जो भोजन को अच्छी तरह पचाने में मदद करता है।

कब्ज और गैस से राहत:
इसके ग्राही (अवशोषक) गुण आंतों में अतिरिक्त पानी को सोखकर मल को मुलायम बनाते हैं, जिससे कब्ज और गैस की समस्या में राहत मिलती है। नियमित सेवन से पेट फूलना और अपच जैसी समस्याएं भी कम होती हैं।

2मेटाबॉलिज्म और वजन प्रबंधन

वजन घटाने में सहायक: कोदो बाजरा के लेखन (स्क्रैपिंग) गुण शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद करते हैं। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे अनावश्यक खाने की इच्छा कम होती है। आयुर्वेद में इसे मेदोहर (चर्बी कम करने वाला) माना गया है, जो मोटापे और अतिरिक्त वजन को नियंत्रित करने में सहायक है।
कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर नियंत्रण:
इसमें मौजूद बीटा-सिटोस्टेरॉल और अन्य स्टेरॉल्स खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाते हैं। साथ ही, इसका रेजिस्टेंट स्टार्च ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों के लिए यह एक सुरक्षित अनाज बन जाता है।

3रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला

एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर: कोदो बाजरा में फेरुलिक एसिड और गैलिक एसिड जैसे पॉलीफेनॉल्स होते हैं, जो शरीर में फ्री रेडिकल्स को नष्ट करके ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं। यह गुण कफ दोष से जुड़ी बीमारियों जैसे सर्दी, खांसी और एलर्जी से बचाने में मदद करता है।

सूजन कम करने वाला:
इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों के दर्द, गठिया और अन्य सूजन संबंधी बीमारियों में राहत दिलाते हैं। यह शरीर में सूजन पैदा करने वाले साइटोकाइन्स को कम करता है, जिससे दर्द और सूजन में कमी आती है।

4खून की कमी (एनीमिया) में लाभकारी

हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाला: आयुर्वेद में कोदो बाजरा को रक्त शोधक (खून साफ करने वाला) माना गया है। इसमें मौजूद आयरन और विटामिन-C की उपस्थिति हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करती है, जिससे एनीमिया के मरीजों को लाभ मिलता है।

पाचन में सुधार:
इसके दीपन (भूख बढ़ाने वाला) और पाचन (पाचन सुधारने वाला) गुण पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं, जिससे भोजन से पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है। यह कमजोरी और थकान को दूर करने में भी मदद करता है।

Ayurvedic Properties

Property
Ayurvedic Term
Meaning
Rasa (Taste)
मधुर, कषाय
इसका स्वाद मीठा और कसैला होता है, जो पित्त और कफ को संतुलित करता है।
Guna (Quality)
लघु, रूक्ष
यह हल्का और सूखा होता है, जिससे पाचन में आसानी होती है लेकिन वात दोष बढ़ सकता है।
Virya (Potency)
शीत
यह ठंडा प्रभाव डालता है, जिससे पित्त दोष शांत होता है।
Vipaka (Post-Digestive)
कटु
पाचन के बाद इसका प्रभाव तीखा होता है, जो पाचन अग्नि को बढ़ाता है।
Dosha Effect
कफ-पित्त शामक, वात बढ़ाने वाला
यह कफ और पित्त दोष को संतुलित करता है, लेकिन वात दोष को बढ़ा सकता है।

How to Consume?

1. शुद्ध पाउडर (चूर्ण) के रूप में:

  • तैयारी: केवल पूरी तरह पके हुए और अच्छी तरह से साफ किए गए दानों का उपयोग करें। इन्हें बारीक पीसकर हल्का भूरा पाउडर बना लें। ध्यान रखें कि दाने पूरी तरह से छिलके रहित हों, क्योंकि कच्चे या अधपके दाने विषाक्त हो सकते हैं।
  • खुराक: रोजाना 3 से 6 ग्राम (लगभग आधा से एक चम्मच) पाउडर लें। इसे गुनगुने पानी या ताजे मक्खन वाले दूध (बटरमिल्क) के साथ मिलाकर सेवन करें।
  • समय: इसे दिन में दो बार, मुख्य भोजन के 30 मिनट बाद लें। यह पाचन को बेहतर बनाने और पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है।

2. पके हुए दाने या दलिया के रूप में:

  • तैयारी: 50 से 100 ग्राम (लगभग आधा कप) अच्छी तरह पके हुए और छिलके रहित दानों को अच्छी तरह धो लें। इन्हें 1:4 के अनुपात में पानी में उबालें, यानी एक कप दाने के लिए चार कप पानी लें। दाने नरम होने तक पकाएं या पतला दलिया बनाने के लिए थोड़ा और पानी डालकर धीमी आंच पर पकाएं।
  • खुराक: रोजाना 50 से 100 ग्राम पके हुए दाने या दलिया का सेवन करें। इसे हल्का नमक डालकर या मूंग दाल के पतले सूप के साथ परोसें।
  • समय: इसे नाश्ते या दोपहर के भोजन के रूप में लें। यह पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और ऊर्जा प्रदान करता है।

3. वात दोष वाले लोगों के लिए विशेष निर्देश:

  • घी या दूध के साथ सेवन: कोदो बाजरा का रूक्ष (सूखा) स्वभाव वात दोष को बढ़ा सकता है। इसलिए वात दोष वाले लोगों को इसे आधा चम्मच घी या गर्म दूध के साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए। यह इसके सूखे प्रभाव को संतुलित करता है और पाचन को आसान बनाता है।

Side Effects & Cautions

  • छिलके वाले दानों से सावधान: नए कटे हुए या अधपके दानों को कभी भी छिलके सहित न खाएं। इनमें मोहकृत (नशा पैदा करने वाले) तत्व होते हैं, जो चक्कर आने, उल्टी या शरीर में कमजोरी पैदा कर सकते हैं। हमेशा दानों को अच्छी तरह से छीलकर और कम से कम 6 महीने पुराना होने के बाद ही इस्तेमाल करें।
  • गर्भावस्था में परहेज: गर्भवती महिलाओं को कोदो बाजरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इसमें गर्भाशय को सिकोड़ने वाले गुण होते हैं, जो समय से पहले प्रसव का कारण बन सकते हैं।
  • वात दोष बढ़ने का खतरा: इसका रूक्ष (सूखा) और गुरु (भारी) स्वभाव वात दोष को बढ़ा सकता है। अगर आपको जोड़ों में दर्द, रूखी त्वचा या कब्ज की समस्या है, तो इसे घी या दूध के साथ मिलाकर ही लें।
  • डायबिटीज के मरीजों के लिए सावधानी: कोदो बाजरा में रेजिस्टेंट स्टार्च होता है, जो ब्लड शुगर लेवल को कम कर सकता है। अगर आप डायबिटीज की दवा ले रहे हैं, तो इसका सेवन करने से पहले अपने ब्लड शुगर लेवल की निगरानी करें, ताकि हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड शुगर) से बचा जा सके।
  • अधिक मात्रा में सेवन से बचें: रोजाना 100 ग्राम से अधिक कोदो बाजरा का सेवन न करें। इसके ग्राही (अवशोषक) गुण अधिक मात्रा में लेने पर कब्ज या मल कठोर होने का कारण बन सकते हैं।

Frequently Asked Questions

कोदो बाजरा को सबसे अच्छा परिणाम पाने के लिए कैसे सेवन करना चाहिए?

कोदो बाजरा का सेवन करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि दाने पूरी तरह से पके हुए और छिलके रहित हों। कच्चे या अधपके दाने विषाक्त हो सकते हैं। औषधीय उपयोग के लिए, रोजाना 50 से 100 ग्राम पके हुए दाने या 3 से 6 ग्राम शुद्ध पाउडर लें। इसे गुनगुने पानी या ताजे मक्खन वाले दूध के साथ मिलाकर भोजन के बाद लें। इससे पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है और पाचन में आसानी होती है।

क्या कोदो बाजरा का दीर्घकालिक उपयोग सुरक्षित है?

हां, कोदो बाजरा का दीर्घकालिक उपयोग सुरक्षित है, बशर्ते इसे सही तरीके से तैयार किया गया हो।

कोदो बाजरा पाचन तंत्र के लिए क्यों फायदेमंद है?

कोदो बाजरा में रेजिस्टेंट स्टार्च होता है, जो कोलन में फर्मेंट होकर ब्यूटिरेट बनाता है। यह ब्यूटिरेट कोलन की कोशिकाओं के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और सूजन कम होती है।

कोदो बाजरा कफ और पित्त दोष को कैसे संतुलित करता है?

कोदो बाजरा का मधुर (मीठा) और कषाय (कसैला) रस कफ और पित्त दोष को संतुलित करने में मदद करता है। इसका लघु (हल्का) और रूक्ष (सूखा) गुण कफ दोष को कम करता है, जबकि शीत (ठंडा) वीर्य पित्त दोष को शांत करता है। यह विशेष रूप से मोटापा, अतिरिक्त चर्बी और सूजन जैसी कफ और पित्त से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी है।

कोदो बाजरा का सेवन करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए?

कोदो बाजरा का सेवन करते समय निम्नलिखित सावधानियों का ध्यान रखें:

  • कच्चे या अधपके दानों का सेवन न करें, क्योंकि इनमें मोहकृत (नशा पैदा करने वाले) तत्व होते हैं।
  • वात दोष वाले लोगों को इसका सेवन घी या दूध के साथ करना चाहिए, क्योंकि इसका रूक्ष (सूखा) स्वभाव वात दोष को बढ़ा सकता है।
  • गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें गर्भाशय को सिकोड़ने वाले गुण होते हैं।
  • डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर लेवल की निगरानी करनी चाहिए, क्योंकि यह ब्लड शुगर को कम कर सकता है।
क्या कोदो बाजरा वजन घटाने में मदद करता है?

हां, कोदो बाजरा वजन घटाने में मदद करता है। इसके लेखन (स्क्रैपिंग) और ग्राही (अवशोषक) गुण शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को कम करते हैं और मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं। यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे अनावश्यक खाने की इच्छा कम होती है। आयुर्वेद में इसे मेदोहर (चर्बी कम करने वाला) माना गया है, जो मोटापे और अतिरिक्त वजन को नियंत्रित करने में सहायक है।

Scientific References

  1. Ask Ayurveda. Paspalum scrobiculatum (Kodravah) – Ayurvedic & modern benefits, uses, side effects, scientific studies. 2024.
  2. Ministry of AYUSH. The Ayurvedic Pharmacopoeia of India, Part I, Volume II. Government of India.
  3. Review of Vikasi Karma of Kodrava with Special Reference to Toxicity. [Research Article/PDF context].
  4. Internal Data Source. Botanical and Chemical Analysis of Paspalum scrobiculatum.
  5. Clinical Research. Resistant starch fermentation and colonocyte fuel mechanisms.
  6. The Ayurvedic Pharmacopoeia of India, Vol. IV. Government of India, Ministry of Health and Family Welfare, Department of AYUSH. (Reference for Kodravah monograph, pp. 101-102).

Article Reviewed By

Syed Aman Hussain

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

Dr. Syed Aman Hussain is a dedicated Ayurvedic physician specializing in the ancient science of detoxification and rejuvenation. An alumnus of the highly esteemed Ayurvedic and Unani Tibbia College, Government of NCT of Delhi, he holds a degree in Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery (BAMS).

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