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अकरकरा (Akarkara)

Botanical: Anacyclus pyrethrum| English: Akarkara, Pellitory Root, Spanish Chamomile

अकरकरा, जिसे आयुर्वेद में एक शक्तिशाली जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है, अपने गर्म और तीखे गुणों के लिए मशहूर है। यह उत्तरी अफ्रीका और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों का मूल निवासी है, लेकिन भारत में सदियों से इसका उपयोग होता आ रहा है। जब आप इसकी जड़ को चबाते हैं, तो जीभ में हल्की झुनझुनी महसूस होती है - यह संकेत है कि यह जड़ी-बूटी आपके शरीर पर असर कर रही है। अकरकरा न केवल पुरुषों की जीवनशक्ति को बढ़ाने में मदद करती है, बल्कि दांतों के दर्द, मसूड़ों की सूजन और यहां तक कि मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है। आयुर्वेद में इसे 'वाजीकरण' (यौन शक्ति बढ़ाने वाला) और 'रसायन' (कायाकल्प करने वाला) श्रेणी में रखा गया है, जो इसे एक बहुमुखी औषधि बनाता है।

Pure अकरकरा (Akarkara) Root Extract

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Top Health Benefits

1दांतों और मसूड़ों की बेहतरीन देखभाल

अकरकरा को 'मैस्टिकेटरी' यानी चबाने वाली औषधि कहा जाता है। जब आप इसकी जड़ को चबाते हैं, तो यह लार के उत्पादन को बढ़ाती है, जो मुंह को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसकी जड़ में मौजूद 'पेलिटोरीन' नामक तत्व दांतों में सुन्न करने जैसा असर देता है, जिससे दांत दर्द में तुरंत आराम मिलता है। यह मसूड़ों की सूजन (पायरिया), मुंह के छालों और गले की खराश के इलाज में भी बहुत प्रभावी है। इसके एंटी-माइक्रोबियल गुण दांतों पर जमी प्लाक को कम करते हैं और मुंह के कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करते हैं। अगर आप दांतों की समस्याओं से परेशान हैं, तो अकरकरा आपके लिए एक प्राकृतिक उपचार हो सकता है।

2मर्दाना ताकत और प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार

अकरकरा एक शक्तिशाली 'वाजीकरण' जड़ी-बूटी है, जो पुरुषों की यौन शक्ति और प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है। आयुर्वेद में इसे पुरुषों की कमजोरी, शीघ्रपतन और नपुंसकता जैसी समस्याओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। शोध बताते हैं कि अकरकरा टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मदद कर सकती है और शुक्राणुओं की संख्या में सुधार ला सकती है। इसे अक्सर अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर दिया जाता है, जिससे इसका असर और भी बढ़ जाता है। अगर आप अपनी जीवनशक्ति को बढ़ाना चाहते हैं, तो अकरकरा एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

3नसों और मस्तिष्क के लिए टॉनिक

आयुर्वेद में अकरकरा को 'मेध्य' यानी बुद्धि बढ़ाने वाली औषधि के रूप में जाना जाता है। यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाती है और नसों को मजबूत बनाती है। जिन बच्चों को बोलने में दिक्कत होती है या जो हकलाते हैं, उन्हें अकरकरा का चूर्ण शहद और वचा के साथ मिलाकर दिया जाता है। यह नसों को उत्तेजित करती है, जिससे बोलने में सुधार होता है। वयस्कों के लिए, यह लकवा (पक्षाघात), कंपकंपी और मिर्गी जैसी समस्याओं में भी फायदेमंद है। अगर आप अपने मस्तिष्क को तेज और नसों को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो अकरकरा एक बेहतरीन विकल्प है।

4सांस संबंधी रोगों में राहत

अकरकरा की गर्म तासीर इसे 'कफ-नाशक' बनाती है। यह फेफड़ों और गले में जमा बलगम को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे सांस लेने में आसानी होती है। सर्दी-जुकाम, पुरानी खांसी और जकड़न जैसी समस्याओं में इसका काढ़ा बहुत फायदेमंद होता है। अगर आप सांस संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, तो अकरकरा का उपयोग आपके लिए राहत का काम कर सकता है।

5रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना

आधुनिक शोध अकरकरा की 'एडाप्टोजेनिक' क्षमता की पुष्टि करते हैं। इसके अर्क ने शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत (इम्युनिटी) को लगभग दो गुना तक बढ़ाया है। यह शरीर को मजबूत और तरोताजा रखने में मदद करती है, जो आयुर्वेद में इसे 'रसायन' श्रेणी में रखने की वजह है। अगर आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं, तो अकरकरा एक प्राकृतिक और प्रभावी उपाय हो सकता है।

6दर्द और सूजन से छुटकारा

अकरकरा का तेल जोड़ों के दर्द, साइटिका और लकवा जैसी समस्याओं में मालिश के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह त्वचा में रक्त के बहाव को बढ़ाता है, जिससे दर्द और सूजन में राहत मिलती है। शोध बताते हैं कि यह दर्द के एहसास को 94% तक कम कर सकता है। अगर आप जोड़ों के दर्द या सूजन से परेशान हैं, तो अकरकरा का तेल एक प्राकृतिक और असरदार उपाय हो सकता है।

Ayurvedic Properties

Property
Ayurvedic Term
Meaning
Rasa (Taste)
कटु (तीखा), तिक्त (कड़वा)
इसका स्वाद तीखा और कड़वा होता है, जो पाचन को बढ़ावा देता है और शरीर को साफ करता है।
Guna (Quality)
रूक्ष (सूखा), तीक्ष्ण (पैना)
यह शरीर में नमी को कम करता है और अपने पैने गुणों से बंद रास्तों को खोलता है।
Virya (Potency)
उष्ण (गर्म)
इसकी तासीर गर्म होती है, जो पाचन शक्ति को बढ़ाती है और ठंड से जुड़ी समस्याओं को दूर करती है।
Vipaka (Post-Digestive)
कटु (तीखा)
पचने के बाद भी इसका असर तीखा रहता है, जो शरीर में गर्मी और उत्तेजना पैदा करता है।
Dosha Effect
वात और कफ दोष को संतुलित करता है, अधिक मात्रा में पित्त बढ़ा सकता है
यह शरीर में सूखेपन और ठहराव को कम करता है, लेकिन ज्यादा इस्तेमाल से गर्मी और चिड़चिड़ाहट बढ़ सकती है।

How to Consume?

अकरकरा का उपयोग करने के आसान और प्रभावी तरीके:

  • जड़ का चूर्ण: 125 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम तक का चूर्ण प्रतिदिन लें। इसे शहद या घी के साथ मिलाकर भोजन के बाद लेना सबसे अच्छा होता है। यह पाचन को बेहतर बनाता है और शरीर को ताकत देता है।
  • कुल्ला या गरारा: मुंह की समस्याओं जैसे दांत दर्द या मसूड़ों की सूजन के लिए, एक चुटकी अकरकरा का चूर्ण गर्म पानी में मिलाकर कुल्ला करें। यह मुंह को साफ करता है और दर्द में राहत देता है।
  • मालिश: लकवा, जोड़ों के दर्द या साइटिका जैसी समस्याओं में अकरकरा के तेल से मालिश करें। यह रक्त संचार को बढ़ाता है और दर्द में आराम दिलाता है।
  • दांत दर्द में राहत: दर्द वाले दांत के नीचे एक चुटकी अकरकरा का चूर्ण दबाकर रखें। यह तुरंत सुन्न करने जैसा असर देता है और दर्द से राहत दिलाता है।

Side Effects & Cautions

  • ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल न करें: अकरकरा की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे ज्यादा मात्रा में लेने से मुंह में छाले, पेट में जलन या बहुत ज्यादा लार टपकने की समस्या हो सकती है।
  • पित्त प्रकृति वालों के लिए सावधानी: जिन लोगों की प्रकृति 'पित्त' (गर्म शरीर) वाली होती है, उन्हें अकरकरा से एसिडिटी, सीने में जलन या गैस्ट्राइटिस की समस्या हो सकती है।
  • गर्भावस्था में परहेज: गर्भवती महिलाओं को अकरकरा का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह गर्भाशय में संकुचन पैदा कर सकता है।
  • बच्चों के लिए सावधानी: बच्चों को अकरकरा केवल डॉक्टर की सलाह पर ही दें, खासकर बोलने संबंधी समस्याओं के लिए।

Frequently Asked Questions

क्या अकरकरा टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने में मदद करता है?

जी हां, अकरकरा टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। आयुर्वेद में इसे 'वाजीकरण' जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है, जो पुरुषों की यौन शक्ति और प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है। पशुओं पर किए गए अध्ययनों से पता चला है कि अकरकरा शरीर में टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को उत्तेजित करता है और यौन इच्छा को बढ़ाता है। अगर आप अपनी मर्दाना ताकत को बढ़ाना चाहते हैं, तो अकरकरा एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

अकरकरा चखने पर जीभ में झुनझुनी क्यों होती है?

अकरकरा में 'अल्काइल-एमाइड्स' नामक तत्व होता है, जिसमें 'पेलिटोरीन' प्रमुख है। यह तत्व जीभ की नसों और लार ग्रंथियों को उत्तेजित करता है, जिससे झुनझुनी महसूस होती है। यह झुनझुनी बताती है कि अकरकरा आपके शरीर पर असर कर रही है। यह मुंह के स्वास्थ्य और नसों को उत्तेजित करने के लिए फायदेमंद होता है।

क्या अकरकरा को लंबे समय तक रोजाना ले सकते हैं?

आयुर्वेद में अकरकरा को आमतौर पर कम समय (4-6 सप्ताह) के लिए लेने की सलाह दी जाती है। इसकी तासीर बहुत गर्म होती है, इसलिए इसे लंबे समय तक अकेले लेने से बचना चाहिए। इसे अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर लेना बेहतर होता है, ताकि इसका असर संतुलित रहे और शरीर को नुकसान न पहुंचे। अगर आप इसे लंबे समय तक लेना चाहते हैं, तो किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Scientific References

  1. EasyAyurveda. Akarkarabha Anacyclus pyrethrum Uses, Research, Side Effects. 2023.
  2. Ayurtimes. Anacyclus Pyrethrum (Akarkara) Benefits, Uses & Side Effects. 2024.
  3. Netmeds. Akarkara: Benefits, Uses, Ayurvedic Indications, Dosage, and Side Effects. 2023.
  4. PharmEasy. Akarkara (Pellitory): Uses, Benefits, Side Effects & More! 2024.
  5. Ask-Ayurveda. Anacyclus pyrethrum (Akarkara) Wiki. 2023.
  6. Akarkara (Anacyclus Pyrethrum) - Properties, Benefits & Dosage. Ayurveda Teaching Document/PDF. 2022.
  7. Journal of Ethnopharmacology. Immunomodulatory activity of petroleum ether extract of Anacyclus pyrethrum. 2010.
  8. Mishra BS, editor. Bhavaprakasha Nighantu of Shri Bhavamishra. Varanasi: Chaukhambha Sanskrit Bhawan; 2010. Haritakyadi Varga.

Article Reviewed By

Syed Aman Hussain

Syed Aman Hussain

BAMS, MD

Dr. Syed Aman Hussain is a dedicated Ayurvedic physician specializing in the ancient science of detoxification and rejuvenation. An alumnus of the highly esteemed Ayurvedic and Unani Tibbia College, Government of NCT of Delhi, he holds a degree in Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery (BAMS).

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