अवलोकन और आधुनिक विज्ञान
सामान्य परिचय (आधुनिक दृष्टि):
कान का मैल (सरुमेन) कान नलिका की ग्रंथियों द्वारा निर्मित एक प्राकृतिक पदार्थ है जो धूल, कीटाणुओं और बाहरी कणों से कान की रक्षा करता है। आमतौर पर यह स्वयं बाहर आता है, लेकिन जब यह अत्यधिक इकट्ठा हो जाता है तो कान में अवरोध, दर्द, सुनने में कठिनाई और खुजली जैसी समस्याएँ उतपन्न होती हैं।
आधुनिक कारण:
1. अतिरिक्त मैल उत्पादन
2. ईयरबड (कॉटन बड) का गलत उपयोग
3. संकरी कान नलिका
4. हीयरिंग एड का उपयोग
5. वृद्धावस्था में स्वाभाविक सफाई तंत्र की कमजोरी
आयुर्वेदिक दृष्टि:
आयुर्वेद इस स्थिति को कर्णवर्च कहता है। कान नलिका वात का स्थान है, जहां कफ दोष की वृद्धि से मांस मेद मल (अपशिष्ट उत्पादन) अत्यधिक होकर कान नलिका में जमा हो जाता है। इस मैल का स्निग्ध गुण (चिकनापन) कान की दीवारों से चिपक जाता है, बाद में रुक्ष होकर (रुक्ष गुण) कठोर हो जाता है और अवरोध उत्पन्न करता है।

