अवलोकन और आधुनिक विज्ञान
अग्रानुलोसाइटोसिस एक गंभीर रक्त संबंधी रोग है जिसमें शरीर में न्यूट्रोफिल्स (एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका) की संख्या बहुत कम हो जाती है। न्यूट्रोफिल्स संक्रमण से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए इनकी कमी से बार-बार संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। लैब टेस्ट में न्यूट्रोफिल्स की संख्या 100 प्रति माइक्रोलीटर से कम पाई जाती है। शुरुआती चरणों में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन बाद में बुखार, थकान और बार-बार संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
आयुर्वेद की दृष्टि से यह रोग रक्त धातु (रक्त ऊतक) के असंतुलन से जुड़ा होता है। इसमें पित्त (गर्मी ऊर्जा) और वात (गति ऊर्जा) दोषों का असंतुलन प्रमुख रूप से देखा जाता है। कुछ दवाइयों के सेवन, विषाक्त पदार्थों के संपर्क या दीर्घकालिक संक्रमण के कारण ओज (प्रतिरक्षा शक्ति) की कमी हो जाती है, जिससे शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली कमजोर पड़ जाती है।